15 May 2026, Fri

‘होर्मुज से सभी जहाजों को गुजरने देने के लिए तैयार हैं’, ईरान के विदेश मंत्री अघारची का बड़ा बयान

नई दिल्ली में ईरान के विदेश मंत्री का बड़ा बयान: “किसी भी मुद्दे का सैन्य समाधान नहीं”

अब्बास अराघची ने अपनी भारत यात्रा के दौरान नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई अहम बयान दिए। उन्होंने साफ कहा कि ईरान से जुड़े किसी भी मुद्दे का समाधान सैन्य तरीके से नहीं निकाला जा सकता और इसके लिए केवल बातचीत ही एकमात्र रास्ता है।

ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान ने कभी भी परमाणु हथियारों की मांग या विकास की नीति नहीं अपनाई है। उन्होंने यह भी बताया कि इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालात काफी जटिल हैं, लेकिन ईरान क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर अहम बयान

अराघची ने कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तैयार है। उन्होंने इसे वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग बताया और कहा कि किसी भी प्रकार की रुकावट दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उन्होंने कहा कि यहां शांति और सुरक्षा बनाए रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है।

“सैन्य समाधान संभव नहीं”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान से जुड़े मुद्दों का समाधान केवल कूटनीति और बातचीत के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय विवादों को बढ़ाने के बजाय सभी पक्षों को संवाद की राह अपनानी चाहिए।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें अब तक पूरी तरह विफल नहीं हुई हैं और बातचीत की संभावनाएं अभी भी बनी हुई हैं।

अमेरिका-ईरान रिश्तों पर टिप्पणी

अराघची ने अमेरिका के साथ संबंधों पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के पास अमेरिका पर भरोसा न करने के कई कारण हैं, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों के बीच संवाद और विश्वास बहाली की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में बेहतर समझ के लिए दोनों पक्षों को प्रयास करने होंगे।

भारत यात्रा का महत्व

ईरानी विदेश मंत्री की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंता बनी हुई है। उनकी बातचीत को क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लंबे समय से मजबूत रहे हैं, और इस यात्रा से दोनों देशों के संबंधों को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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