राजस्थान के अजमेर में मेयर चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। नगर निगम में बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस ने अपने पार्षदों को कर्नाटक भेज दिया है। पार्टी की ओर से यह कदम पार्षदों को एकजुट रखने और संभावित खरीद-फरोख्त या क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच उठाया गया है। कांग्रेस के सभी पार्षदों को बेंगलुरु भेजे जाने की जानकारी सामने आई है, जहां उन्हें एक रिसॉर्ट में ठहराया गया है।
अजमेर नगर निगम के मेयर का चुनाव 21 सितंबर को होना है। ऐसे में दोनों प्रमुख दल अपने-अपने पार्षदों के साथ-साथ निर्दलीय पार्षदों को लेकर भी रणनीति बनाने में जुटे हैं।
कांग्रेस बहुमत से चार सीट दूर
अजमेर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम में कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है, जबकि भाजपा के खाते में 32 सीटें आई हैं। वहीं 11 निर्दलीय पार्षद चुनाव जीतकर आए हैं। बहुमत के लिए 41 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से चार सीट दूर है।
कांग्रेस के पास अपने दम पर बोर्ड बनाने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है। दूसरी ओर भाजपा भी बहुमत से पीछे है। इसलिए 11 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। दोनों दलों के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन बोर्ड गठन और मेयर चुनाव के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
खरीद-फरोख्त के डर के बीच बाड़ेबंदी
कांग्रेस को आशंका है कि मेयर चुनाव से पहले उसके पार्षदों से संपर्क कर उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश की जा सकती है। इसी वजह से पार्टी ने अपने पार्षदों को एक साथ रखने का फैसला किया है। बेंगलुरु भेजे गए पार्षदों को एक रिसॉर्ट में ठहराने की बात सामने आई है।
पार्षदों को एकजुट रखने की यह कवायद मेयर चुनाव तक जारी रहने की संभावना है। पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने 37 पार्षदों को साथ रखने के अलावा बहुमत के लिए जरूरी अतिरिक्त समर्थन जुटाना है।
निर्दलीय पार्षदों पर टिकी नजर
अजमेर में किसी भी प्रमुख दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में 11 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद अहम हो गई है। कांग्रेस को बहुमत तक पहुंचने के लिए कम से कम चार अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है। इसी कारण दोनों प्रमुख दल निर्दलीय पार्षदों को लेकर अपनी रणनीति बना रहे हैं।
मौजूदा स्थिति में निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से ही नगर निगम में बोर्ड गठन का रास्ता साफ हो सकता है। मेयर चुनाव में कौन सा पक्ष बहुमत जुटा पाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
अजमेर में बदला चुनावी समीकरण
अजमेर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 37 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी स्थिति बनाई है। भाजपा को 32 सीटें मिली हैं, जबकि 11 निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए हैं। इस तरह किसी भी दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है।
अब मेयर चुनाव से पहले पार्षदों की बाड़ेबंदी और निर्दलीयों के समर्थन को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस के पार्षदों को कर्नाटक भेजे जाने के बाद अजमेर के मेयर चुनाव को लेकर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

