3 Aug 2026, Mon

मुंबई-नासिक हाईवे के गड्ढे ने ली TDRF जवान की जान, कोहिनूर हादसे में बचाई थीं कई जिंदगियां

मुंबई-नासिक हाईवे पर गड्ढों की समस्या एक बार फिर एक दर्दनाक हादसे की वजह बन गई। ठाणे डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (TDRF) के 31 वर्षीय जवान विकास लहू गोरे की शाहपुर तालुका में एक सड़क हादसे में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उनकी बाइक सड़क पर बने एक बड़े गड्ढे में फंस गई, जिससे वह संतुलन खो बैठे और डिवाइडर से टकरा गए। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

विकास गोरे ठाणे जिले के बामने गांव के निवासी थे और TDRF में जवान के रूप में तैनात थे। वह अपनी ड्यूटी के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में हुआ यह हादसा उनके परिवार और साथियों के लिए गहरा सदमा बन गया।

कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना मुंबई-नासिक हाईवे पर शाहपुर तालुका में भारंगी नदी के पुल के पास हुई। विकास गोरे अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से ड्यूटी पर जा रहे थे। इसी दौरान उनकी बाइक सड़क पर बने एक बड़े गड्ढे में चली गई। अचानक झटका लगने से उनका बाइक पर से नियंत्रण छूट गया और वह सड़क पर गिर पड़े। गिरने के बाद उनका सिर और शरीर डिवाइडर से जोरदार तरीके से टकराया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।

हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें शाहपुर उपजिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि उन्हें बचाया नहीं जा सका।

कुछ दिन पहले ही बचाई थीं कई जिंदगियां

विकास लहू गोरे की मौत इसलिए भी अधिक दुखद मानी जा रही है क्योंकि कुछ ही दिन पहले उन्होंने भिवंडी के कोहिनूर बिल्डिंग हादसे में राहत और बचाव कार्य में अहम भूमिका निभाई थी। उस अभियान के दौरान उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने में मदद की थी।

उनके साथ काम करने वाले अधिकारियों और सहयोगियों का कहना है कि विकास गोरे बेहद बहादुर, समर्पित और कर्तव्यनिष्ठ जवान थे। वह हमेशा आपदा के समय सबसे आगे रहकर लोगों की मदद करते थे।

हाईवे के गड्ढों पर फिर उठे सवाल

इस हादसे के बाद मुंबई-नासिक हाईवे की खराब सड़क और गड्ढों की समस्या को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मार्ग पर लंबे समय से बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं, जिनके कारण कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया।

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने सड़क की तत्काल मरम्मत, गड्ढों को भरने और जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत कर दी जाती, तो शायद विकास गोरे की जान बच सकती थी।

परिवार और साथियों में शोक

विकास गोरे के निधन से उनके परिवार में मातम पसरा हुआ है। TDRF के अधिकारियों और जवानों ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। एक ऐसे जवान की मौत, जिसने दूसरों की जान बचाने के लिए कई बार अपनी जान जोखिम में डाली, सड़क पर बने एक गड्ढे की वजह से हो जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

यह घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और सड़क रखरखाव की व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है। अब देखना होगा कि इस दर्दनाक हादसे के बाद संबंधित विभाग गड्ढों की समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *