देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्यसभा ने सोमवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन देना, उनके फंसे हुए भुगतान की समस्या का समाधान करना और कारोबार को अधिक सरल और पारदर्शी बनाना है।
विधेयक में MSME के लिए मुफ्त और स्वैच्छिक पंजीकरण (फ्री एंड वॉलंटरी रजिस्ट्रेशन) हेतु एक डिजिटल प्लेटफॉर्म अधिसूचित करने का प्रावधान किया गया है। इससे छोटे उद्यमों को औपचारिक व्यवस्था से जुड़ने में आसानी होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से मिल सकेगा।
क्या है MSME (संशोधन) बिल, 2026?
यह विधेयक वर्ष 2006 के मूल MSME अधिनियम में कई महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित करता है। सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में तकनीकी बदलाव, डिजिटल सिस्टम के बढ़ते उपयोग और बदलते कारोबारी माहौल को देखते हुए कानून में सुधार की आवश्यकता महसूस की गई थी।
राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि सरकार MSME क्षेत्र के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद से MSME सेक्टर को दिए जाने वाले ऋण में कई गुना वृद्धि हुई है और यह संशोधन विधेयक इस क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों को दूर करने में मदद करेगा।
MSME की परिभाषा और टर्नओवर सीमा में बदलाव
विधेयक के तहत MSME की परिभाषा में संशोधन किया गया है। इसके साथ ही टर्नओवर की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये कर दी गई है। इससे बड़ी संख्या में ऐसे उद्यम MSME श्रेणी में आ सकेंगे, जो पहले इस दायरे से बाहर थे।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से अधिक उद्योगों को MSME से जुड़ी योजनाओं, ऋण सुविधाओं और अन्य प्रोत्साहनों का लाभ मिल सकेगा।
फंसे हुए भुगतान की समस्या पर बड़ा कदम
MSME क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक भुगतान में देरी है। इस समस्या के समाधान के लिए विधेयक में महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है कि केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) को MSME से खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं के इनवॉइस का सेटलमेंट TReDS (Trade Receivables Discounting System) प्लेटफॉर्म के माध्यम से करना होगा।
इस व्यवस्था से MSME इकाइयों को समय पर भुगतान मिलने की संभावना बढ़ेगी और उनकी लिक्विडिटी (नकदी प्रवाह) की समस्या कम होगी। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि राज्य सरकारें अपने सार्वजनिक उपक्रमों के लिए भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने का प्रयास करेंगी।
महिलाओं और थर्ड जेंडर को मिलेगा प्रोत्साहन
मंत्री जीतन राम मांझी ने बताया कि MSME क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 39 प्रतिशत हो गई है। सरकार इस क्षेत्र में महिलाओं के साथ-साथ थर्ड जेंडर समुदाय की भागीदारी को भी बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। इससे उद्यमिता को सामाजिक रूप से अधिक समावेशी बनाने में मदद मिलेगी।
अर्थव्यवस्था की रीढ़ है MSME सेक्टर
विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि MSME देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यह क्षेत्र रोजगार सृजन, नवाचार और निर्यात को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश के GDP और औद्योगिक विकास में MSME का बड़ा योगदान है।
सरकार का दावा है कि यह संशोधन विधेयक कारोबार को आसान बनाने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल करने, डिजिटल पंजीकरण को बढ़ावा देने और भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है। अगर यह कानून प्रभावी रूप से लागू होता है, तो देश के लाखों छोटे उद्यमों को इससे सीधा लाभ मिल सकता है और MSME सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

