देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में हुई ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। खासकर रोजाना ऑफिस आने-जाने वाले, लंबी दूरी तय करने वाले ड्राइवर और डिलीवरी या ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है। बढ़ती महंगाई के बीच अब हर कोई अपनी गाड़ी का माइलेज बढ़ाने के तरीके तलाश रहा है ताकि ईंधन पर होने वाला खर्च कम किया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लोग अपनी ड्राइविंग आदतों और वाहन के रखरखाव में कुछ छोटे बदलाव कर लें, तो हर महीने अच्छी-खासी बचत संभव है।
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के मुताबिक सबसे पहले गाड़ी चलाने की स्पीड पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। तेज रफ्तार में वाहन चलाने से इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे ईंधन की खपत तेजी से बढ़ जाती है। अगर कार को लगातार 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड पर चलाया जाए, तो माइलेज कम होने लगता है। वहीं सामान्य और स्थिर गति में वाहन चलाने से ईंधन की बचत होती है। अचानक ब्रेक लगाने और तेजी से एक्सीलेटर दबाने की आदत भी पेट्रोल और डीजल की खपत बढ़ाती है। स्मूथ और नियंत्रित ड्राइविंग से माइलेज में सुधार देखा जाता है।
वाहन की नियमित सर्विसिंग भी माइलेज बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। कई बार लोग समय पर इंजन ऑयल नहीं बदलवाते या एयर फिल्टर की सफाई पर ध्यान नहीं देते, जिसकी वजह से इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। खराब स्पार्क प्लग, गंदा एयर फिल्टर और पुराना इंजन ऑयल गाड़ी को ज्यादा ईंधन खर्च करने पर मजबूर कर देता है। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि हर 5 से 6 हजार किलोमीटर के बाद इंजन ऑयल जरूर बदलवाना चाहिए और कंपनी द्वारा तय सर्विस शेड्यूल का पालन करना चाहिए। इससे इंजन बेहतर तरीके से काम करता है और माइलेज भी बढ़ता है।
टायर में सही एयर प्रेशर बनाए रखना भी बेहद जरूरी माना जाता है। कम हवा वाले टायर सड़क पर ज्यादा घर्षण पैदा करते हैं, जिससे इंजन को अधिक ताकत लगानी पड़ती है और ईंधन ज्यादा खर्च होता है। विशेषज्ञों के अनुसार हर 10 से 15 दिन में टायर प्रेशर चेक कराना चाहिए। कंपनी द्वारा बताए गए सही एयर प्रेशर पर वाहन चलाने से न केवल माइलेज बेहतर होता है, बल्कि टायर की लाइफ भी बढ़ती है।
इसके अलावा गाड़ी में जरूरत से ज्यादा वजन रखने से भी माइलेज प्रभावित होता है। कई लोग कार में अतिरिक्त सामान हमेशा रखते हैं, जिससे इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। जितना हल्का वाहन होगा, उतनी ही कम ईंधन की खपत होगी। वहीं ट्रैफिक सिग्नल पर लंबे समय तक रुकने पर इंजन बंद करना भी ईंधन बचाने का अच्छा तरीका माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लोग इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें, तो 10 से 20 प्रतिशत तक ईंधन की बचत संभव है। बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों के दौर में यह बचत हर महीने हजारों रुपये तक पहुंच सकती है। ऐसे में स्मार्ट ड्राइविंग और नियमित वाहन देखभाल अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन गई है।

