Narendra Modi अपनी पांच देशों की विदेश यात्रा के तीसरे चरण में Sweden पहुंचे, जहां उन्होंने गोटेनबर्ग में आयोजित यूरोपीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोप के बीच आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर जोर दिया। उन्होंने यूरोप की बड़ी कंपनियों से भारत में निवेश बढ़ाने की अपील करते हुए कहा, “भारत में निवेश करें, और अभी निवेश करें।”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत और यूरोप के संबंध एक नए टर्निंग प्वाइंट पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक प्रगति हो रही है।
पीएम मोदी ने यूरोप के बड़े उद्योगपतियों और कंपनियों के प्रतिनिधियों के सामने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और निवेश के अवसरों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और यहां 140 करोड़ लोगों का विशाल बाजार मौजूद है। भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग और मजबूत होता इंफ्रास्ट्रक्चर देश को वैश्विक निवेश का बड़ा केंद्र बना रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत-यूरोप औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखे। उन्होंने कहा कि यूरोपीय कंपनियों को भारत में बेहतर सहयोग और सहायता देने के लिए “ERT इंडिया डेस्क” या “इंडिया एक्शन ग्रुप” बनाया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य भारत में पहले से मौजूद कंपनियों को समर्थन देना और नई कंपनियों के लिए निवेश प्रक्रिया को आसान बनाना होगा।
इसके अलावा पीएम मोदी ने वार्षिक भारत-यूरोप CEO गोलमेज सम्मेलन आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि दोनों क्षेत्रों के उद्योग जगत के बीच सीधा संवाद और सहयोग बढ़ सके। उन्होंने सेक्टर-विशिष्ट वर्किंग ग्रुप्स बनाने की भी बात कही, जिससे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में तेजी से काम किया जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि प्रमुख परियोजनाओं की समयबद्ध समीक्षा के लिए सरकार समर्थित संस्थागत तंत्र बनाया जाएगा, ताकि निवेश से जुड़े कार्यों में तेजी लाई जा सके। उन्होंने यूरोपीय कंपनियों को चुनौती देते हुए कहा कि हर कंपनी अगले पांच वर्षों के भीतर भारत के लिए एक नई और साहसिक प्रतिबद्धता तय करे।
पीएम मोदी ने कहा, “क्या यहां मौजूद हर कंपनी भारत के लिए नई प्रतिबद्धता जता सकती है? क्या हम ऐसी बड़ी परियोजनाओं की पहचान कर सकते हैं जो अगले पांच वर्षों में शुरू हों? भारत सरकार हर परियोजना का पूरा समर्थन करेगी।”
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत में पिछले 12 वर्षों में हुए आर्थिक सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत “Reform, Perform and Transform” के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है और सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण सुधारों की रफ्तार लगातार तेज हुई है।
इस यात्रा के दौरान स्वीडन ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान “रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार कमांडर ग्रैंड क्रॉस” से भी सम्मानित किया। यह सम्मान दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों और भारत की वैश्विक भूमिका को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी की यह यात्रा भारत और यूरोप के बीच व्यापार, टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में नए निवेश और सहयोग के रास्ते खोल सकती है।

