India में लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने आम लोगों की जेब पर बड़ा असर डालना शुरू कर दिया है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि एक औसत भारतीय अपनी कमाई का कितना हिस्सा सिर्फ ईंधन खरीदने में खर्च कर देता है। इसी बीच आई एक नई रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं।
‘Gasoline Affordability’ नाम की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में एक औसत व्यक्ति अपनी मासिक आय का करीब 8 से 10 प्रतिशत हिस्सा पेट्रोल और डीजल खरीदने में खर्च कर देता है। यह रिपोर्ट Global Petrol Prices द्वारा जारी की गई है। रिपोर्ट तैयार करने के लिए विश्व बैंक की प्रति व्यक्ति आय और GDP से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है।
रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया कि एक औसत व्यक्ति हर महीने लगभग 40 लीटर पेट्रोल या डीजल की खपत करता है। इसी आधार पर अलग-अलग देशों में ईंधन की वहन क्षमता यानी affordability की तुलना की गई।
भारत में क्यों बढ़ रहा है बोझ?
हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने विदेशी मुद्रा बचाने और आयात कम करने के उद्देश्य से देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने, सोने की खरीदारी रोकने और गैर-जरूरी विदेश यात्राएं टालने की अपील की थी। इसके बाद सरकार ने कई आर्थिक कदम भी उठाए हैं।
सरकार ने सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। वहीं दूसरी ओर, तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। यह बढ़ोतरी पिछले चार वर्षों में पहली बड़ी वृद्धि मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। इससे देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनियों को रोजाना करीब 1000 से 1200 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था, जिसके बाद कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया गया।
पाकिस्तान और नेपाल की स्थिति और खराब
रिपोर्ट में भारत की तुलना पड़ोसी देशों से भी की गई है। आंकड़ों के अनुसार Pakistan, Nepal और म्यांमार जैसे देशों में स्थिति भारत से कहीं ज्यादा खराब है। वहां आम लोगों को अपनी मासिक आय का 47 से 52 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ पेट्रोल और डीजल खरीदने पर खर्च करना पड़ता है।
यानी इन देशों में लोग अपनी कमाई का लगभग आधा हिस्सा ईंधन पर खर्च कर रहे हैं। दूसरी ओर Qatar और Kuwait जैसे तेल उत्पादक देशों में लोगों को सिर्फ 1 से 2 प्रतिशत आय ही ईंधन पर खर्च करनी पड़ती है।
सरकार ने उठाए कई कदम
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने कुछ कर संबंधी बदलाव भी किए हैं। पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स लगाया गया है, जबकि डीजल और विमान ईंधन (ATF) पर टैक्स में कटौती की गई है।
सरकार का कहना है कि घरेलू खपत के लिए मौजूदा टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में आम उपभोक्ताओं पर ईंधन खर्च का बोझ और बढ़ सकता है।

