भारत में विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े पेंशन फंड ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब ₹3,000 करोड़ से अधिक) निवेश करने की घोषणा की है। इस निवेश का प्रधानमंत्री Narendra Modi ने स्वागत करते हुए इसे भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, स्थिर नीतियों और उज्ज्वल विकास संभावनाओं पर वैश्विक विश्वास का प्रमाण बताया।
मेलबर्न में आयोजित ऑस्ट्रेलिया-इंडिया CEO फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस इवेंट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री Anthony Albanese के साथ उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में दोनों देशों के 200 से अधिक उद्योगपति, निवेशक और कारोबारी नेता शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देना था।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सरकार निवेशकों के लिए पारदर्शी, स्थिर और उद्योग-अनुकूल माहौल उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि भारत का विशाल उपभोक्ता बाजार, तेजी से विकसित हो रहा डिजिटल इकोसिस्टम और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक अवसर प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स, माइनिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फिनटेक, डिजिटल इकोनॉमी, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), लॉजिस्टिक्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश करने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं और दोनों देश मिलकर वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बना सकते हैं।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को जल्द अंतिम रूप देने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति देगा तथा उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने राज्यों और ऑस्ट्रेलियाई प्रांतों के बीच भी प्रत्यक्ष आर्थिक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में सहयोग को भी दोनों देशों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने भारत में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों की बढ़ती मौजूदगी का स्वागत करते हुए कहा कि इससे युवाओं को वैश्विक स्तर की शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। साथ ही उन्होंने लिथियम, बैटरी टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस सप्लाई चेन, AI और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की अपील की।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में लागू हुए भारत-ऑस्ट्रेलिया ECTA समझौते के बाद दोनों देशों के व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 24.1 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े पेंशन फंड का यह नया निवेश भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निवेश से न केवल देश में आधारभूत ढांचे के विकास को गति मिलेगी, बल्कि रोजगार सृजन, विदेशी पूंजी प्रवाह और आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलेगी। यह निवेश इस बात का संकेत है कि भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद, स्थिर और दीर्घकालिक निवेश गंतव्य के रूप में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

