NIA की बड़ी कार्रवाई: पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के बाद नार्को-टेरर मॉड्यूल का मास्टरमाइंड इकबाल सिंह शेरा गिरफ्तार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई करते हुए हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े नार्को-टेरर मॉड्यूल के मास्टरमाइंड इकबाल सिंह उर्फ शेरा को भारत लाकर गिरफ्तार कर लिया है। शेरा पिछले करीब 6 साल से पुर्तगाल में छिपा हुआ था, जहां से उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
6 साल से था फरार, पुर्तगाल से हुआ प्रत्यर्पण
जानकारी के मुताबिक, इकबाल सिंह शेरा वर्ष 2020 में भारत से फरार होकर पुर्तगाल भाग गया था। उसके खिलाफ अक्टूबर 2020 से गैर-जमानती वारंट जारी था, जबकि जून 2021 में उसके खिलाफ इंटरपोल नोटिस भी जारी किया गया था। लगातार राजनयिक और कानूनी प्रयासों के बाद NIA ने उसे भारत लाने में सफलता हासिल की।
भारत पहुंचते ही एजेंसी ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।
नार्को-टेरर नेटवर्क का मास्टरमाइंड
NIA की जांच में सामने आया है कि इकबाल सिंह शेरा पाकिस्तान से चल रहे हेरोइन तस्करी नेटवर्क और आतंकी फंडिंग का मुख्य संचालक था। वह ड्रग्स की तस्करी से मिलने वाले पैसे को हवाला नेटवर्क के जरिए पाकिस्तान और कश्मीर में सक्रिय हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों तक पहुंचाता था।
एजेंसी के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क ड्रग्स और आतंकवाद के गठजोड़ यानी “नार्को-टेरर मॉड्यूल” के रूप में काम कर रहा था, जिसका संचालन शेरा कर रहा था।
पंजाब से जुड़ा है मामला
यह केस मूल रूप से पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था। शुरुआत में एक ओवरग्राउंड वर्कर हिलाल अहमद शेरगोजरी की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ी थी। उसके पास से ड्रग बिक्री से जुड़े करीब 29 लाख रुपये बरामद हुए थे।
हिलाल, मारे गए आतंकी कमांडर रियाज अहमद नाइकू का करीबी सहयोगी बताया गया था। इसके बाद जांच NIA को सौंपी गई, जिसने पूरे नेटवर्क को खंगालते हुए शेरा की भूमिका उजागर की।
आतंक फंडिंग नेटवर्क पर बड़ा प्रहार
NIA का कहना है कि यह गिरफ्तारी पाकिस्तान समर्थित नार्को-टेरर नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी सफलता है। एजेंसी अब इस पूरे मॉड्यूल के अन्य सदस्यों और वित्तीय नेटवर्क की भी गहन जांच कर रही है।
आगे की जांच जारी
फिलहाल इकबाल सिंह शेरा से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और किस तरह से हवाला और ड्रग्स के जरिए आतंक की फंडिंग की जा रही थी।

