वॉशिंगटन: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की बैठक थी। करीब डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में ईरान, गाजा, लेबनान और अब्राहम समझौते समेत कई अहम क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। इस मुलाकात को अमेरिका और इजरायल के संबंधों में आई हालिया खटास को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बैठक ऐसे समय हुई जब दोनों नेता अपने-अपने देशों में राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं। नेतन्याहू आगामी चुनावों की चुनौती का सामना कर रहे हैं, जबकि ट्रंप पर नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले क्षेत्रीय तनाव कम करने और आर्थिक दबाव को नियंत्रित करने का दबाव बताया जा रहा है।
बैठक से जुड़े एक इजरायली अधिकारी के अनुसार, नेतन्याहू ने ट्रंप और उनके कैबिनेट सदस्यों से स्पष्ट कहा कि यदि ईरान इजरायल पर हमला करता है, तो इजरायल उसका जवाब देगा। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आगे की व्यापक रणनीति को लेकर वे अमेरिका के राष्ट्रपति के निर्णय और समन्वय पर भरोसा करेंगे।
व्हाइट हाउस में हुई इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सहित ट्रंप प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। बैठक के बाद नेतन्याहू ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह बातचीत साझा लक्ष्यों की स्पष्ट समझ के साथ हुई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर व्यापक चर्चा हुई।
नेतन्याहू ने बैठक के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इजरायल का स्पष्ट मत है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण विषय बताया।
सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच गाजा में चल रहे संघर्ष, लेबनान की स्थिति और मध्य पूर्व में संभावित कूटनीतिक पहलों पर भी विचार-विमर्श हुआ। अब्राहम समझौते को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय साझेदारियों को मजबूत करने के विकल्पों पर भी चर्चा की गई।
इस बीच, जब ट्रंप और नेतन्याहू की बैठक चल रही थी, तब व्हाइट हाउस के बाहर कुछ प्रदर्शनकारियों ने नेतन्याहू के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने गाजा युद्ध और क्षेत्रीय तनाव को लेकर विरोध जताया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल ईरान से जुड़े सुरक्षा मुद्दों तक सीमित नहीं थी, बल्कि अमेरिका-इजरायल रणनीतिक साझेदारी के भविष्य पर भी केंद्रित थी। दोनों नेताओं के सामने घरेलू राजनीतिक चुनौतियां हैं और ऐसे में यह बैठक उनके राजनीतिक और कूटनीतिक समीकरणों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल दोनों देशों की ओर से बैठक के विस्तृत आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन नेतन्याहू के बयान से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि इजरायल ईरान की किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार है। आने वाले दिनों में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त रणनीति पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

