देश के बैंकों ने पिछले कुछ वर्षों में मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) बनाए न रखने वाले ग्राहकों से भारी रकम वसूली है। वित्त मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों ने मिलकर लगभग 26,100 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला। इस सूची में HDFC बैंक, Axis बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा सबसे ऊपर रहे, जिन्होंने अपने ग्राहकों से सबसे अधिक पेनल्टी चार्ज वसूले।
मिनिमम एवरेज बैलेंस वह न्यूनतम औसत राशि होती है, जिसे ग्राहकों को अपने बचत खाते में बनाए रखना होता है। यदि कोई ग्राहक बैंक द्वारा निर्धारित MAB को बनाए रखने में विफल रहता है, तो बैंक उस पर जुर्माना लगा सकता है।
HDFC बैंक ने वसूला सबसे ज्यादा जुर्माना
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, HDFC बैंक ने MAB न बनाए रखने वाले ग्राहकों से 5,670 करोड़ रुपये की पेनल्टी वसूली, जो इस सूची में सबसे अधिक है। इसके बाद Axis बैंक ने 3,787 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ बड़ौदा ने 2,028 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला।
अन्य प्रमुख बैंकों में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने 1,896 करोड़ रुपये और इंडियन बैंक ने 1,777 करोड़ रुपये की पेनल्टी वसूली।
किन वर्षों का है डेटा?
वित्त मंत्रालय ने राज्यसभा में जो आंकड़े पेश किए हैं, उनमें सरकारी और निजी बैंकों के लिए अलग-अलग अवधि शामिल है।
- सरकारी बैंकों का डेटा: वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक
- निजी बैंकों का डेटा: वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक
यह जानकारी 28 जुलाई को राज्यसभा में एक लिखित जवाब के दौरान साझा की गई।
सरकार ने क्या कहा?
वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने ग्राहकों को राहत देने के लिए अपने सेवा शुल्क ढांचे की समीक्षा की है।
सरकार के अनुसार, अधिकांश सरकारी बैंकों ने बचत खातों में मिनिमम एवरेज बैलेंस न बनाए रखने पर लगने वाली पेनल्टी समाप्त कर दी है। इसका उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं को अधिक सुलभ और ग्राहक-अनुकूल बनाना है।
12 में से 10 सरकारी बैंकों ने हटाई पेनल्टी
मंत्री ने राज्यसभा को बताया कि 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से 10 बैंकों ने बचत खातों के लिए MAB पेनल्टी पूरी तरह समाप्त कर दी है।
बाकी दो सरकारी बैंकों ने अपने बोर्ड द्वारा स्वीकृत नीतियों और व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार इन शुल्कों को तर्कसंगत बनाया है।
ग्राहकों पर क्या पड़ता है असर?
मिनिमम बैलेंस से जुड़े नियमों का सबसे अधिक असर उन ग्राहकों पर पड़ता है, जिनकी आय सीमित होती है या जिनके खातों में नियमित रूप से बड़ी राशि जमा नहीं रहती।
बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि MAB पेनल्टी छोटे बचत खाताधारकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल सकती है। इसी वजह से कई सरकारी बैंकों ने हाल के वर्षों में इस तरह के शुल्क समाप्त करने का फैसला किया है।
हालांकि, निजी क्षेत्र के कई बैंक अभी भी अपने बचत खातों के लिए MAB नियम लागू करते हैं और निर्धारित औसत बैलेंस न रखने पर पेनल्टी वसूलते हैं।
राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि पिछले कुछ वर्षों में MAB पेनल्टी बैंकों के लिए एक महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत रही है। अब यह देखना होगा कि आने वाले समय में निजी बैंक भी ग्राहकों को राहत देने के लिए अपने शुल्क ढांचे में बदलाव करते हैं या नहीं।

