फिल्मी दुनिया में कम उम्र में अपनी पहचान बनाने वाले कई लोग हैं, लेकिन 21 साल की उम्र में किसी बड़े प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी संभालना अपने आप में खास बात है। इन दिनों अनुप्रिया नागर अपनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर चर्चा में हैं। खास बात यह है कि इस फिल्म से जुड़ने के लिए उन्होंने अपनी यूके की जमा-पूंजी का बड़ा हिस्सा लगा दिया। अनुप्रिया के मुताबिक, इस फैसले के पीछे केवल फिल्म में निवेश करने की सोच नहीं थी, बल्कि नीम करोली बाबा और उनकी आध्यात्मिक विरासत से उनका गहरा जुड़ाव था।
‘हनुमान अंश’ अगस्त में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म की शुरुआत बड़े स्तर के प्रचार के बिना हुई, लेकिन दर्शकों की प्रतिक्रिया के बाद इसकी चर्चा लगातार बढ़ती गई। फिल्म की कहानी नीम करोली बाबा के जीवन और उनके आध्यात्मिक प्रभाव के इर्द-गिर्द बुनी गई है। फिल्म की सफलता के साथ ही इसकी युवा प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर के सफर ने भी लोगों का ध्यान खींचा है।
पोस्ट-प्रोडक्शन के दौरान फिल्म से जुड़ीं अनुप्रिया
अनुप्रिया नागर ने बताया कि वह फिल्म के शुरुआती निर्माण के दौरान इसका हिस्सा नहीं थीं। जब उन्होंने प्रोजेक्ट से जुड़ने का फैसला किया, तब फिल्म की शूटिंग और मुख्य निर्माण का काम पूरा हो चुका था। उस समय फिल्म को पोस्ट-प्रोडक्शन के लिए अतिरिक्त फंडिंग की जरूरत थी।
फिल्म की कहानी और उसके आध्यात्मिक विषय ने अनुप्रिया को काफी प्रभावित किया। इसके बाद उन्होंने अपनी बचत का इस्तेमाल इस प्रोजेक्ट में करने का फैसला किया। उनके लिए यह केवल आर्थिक निवेश नहीं था, बल्कि एक ऐसी कहानी का हिस्सा बनने का मौका था, जिससे वह भावनात्मक रूप से जुड़ चुकी थीं।
अनुप्रिया ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म का पूरा बजट उन्होंने अकेले नहीं उठाया। फिल्म को तीन महिलाओं ने मिलकर प्रोड्यूस किया है और वह उनमें सबसे कम उम्र की हैं। कुल बजट में उनका योगदान लगभग एक-तिहाई बताया गया है।
नीम करोली बाबा से क्यों प्रभावित हुईं अनुप्रिया?
अनुप्रिया का कहना है कि नीम करोली बाबा का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। विदेशों में भी कई लोग उनके विचारों और आध्यात्मिक जीवन से प्रभावित हुए। अनुप्रिया ने इस संदर्भ में लैरी ब्रिलियंट और स्टीव जॉब्स जैसे चर्चित नामों का भी उल्लेख किया।
उनके मुताबिक, नीम करोली बाबा के बारे में विदेशों में काफी लोगों ने जाना, लेकिन भारत में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो उनके जीवन और विचारों से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। यही सोच अनुप्रिया को इस प्रोजेक्ट की ओर खींच लाई। वह चाहती हैं कि फिल्म के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोग बाबा के जीवन, उनकी शिक्षाओं और उनके आध्यात्मिक प्रभाव के बारे में जान सकें।
फिल्म से जुड़ने से पहले की थी लंबे समय तक रिसर्च
अनुप्रिया ने फिल्म से जुड़ने से पहले इस विषय को समझने के लिए करीब एक साल तक रिसर्च की। उन्होंने नीम करोली बाबा के जीवन, उनके विचारों और उनसे जुड़े लोगों के अनुभवों को समझने की कोशिश की। इसी दौरान उनका इस कहानी के साथ जुड़ाव और मजबूत होता गया।
फिल्म की सफलता को अनुप्रिया बाबा का आशीर्वाद और चमत्कार मानती हैं। कम उम्र में इतना बड़ा आर्थिक और रचनात्मक फैसला लेने वाली अनुप्रिया का यह सफर अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

