29 Jun 2026, Mon

खरीफ फसल सत्र के लिए बीज की कोई कमी नहीं, समय पर सप्लाई पहुंचाना चिंता का विषय

देश में खरीफ फसल सीजन की तैयारियों के बीच किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। निजी बीज कंपनियों ने इस वर्ष खरीफ बुवाई के लिए सामान्य से अधिक बीजों का भंडार तैयार किया है। हालांकि, अल-नीनो के प्रभाव और कमजोर मानसून की आशंका के चलते सबसे बड़ी चुनौती बारिश प्रभावित क्षेत्रों तक समय पर बीज पहुंचाने की बनी हुई है।

फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (FSII) के अनुसार, निजी बीज कंपनियों ने इस साल 20 से 30 प्रतिशत अतिरिक्त बीज भंडार तैयार किया है। आमतौर पर कंपनियां 15 से 20 प्रतिशत तक बफर स्टॉक रखती हैं, लेकिन इस बार मक्का, धान और मोटे अनाज (मिलेट्स) के रिकॉर्ड उत्पादन के कारण अतिरिक्त भंडारण संभव हो पाया है।

75 प्रतिशत किसानों ने पहले ही खरीदे बीज

एफएसआईआई के चेयरमैन अजय राणा ने बताया कि हाल ही में एक हजार किसानों पर किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 75 प्रतिशत किसान खरीफ सीजन के लिए पहले ही बीज खरीद चुके हैं, जबकि शेष 25 प्रतिशत किसान अभी मानसून के आगमन का इंतजार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जो किसान अभी बीज खरीदने का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होगा, ताकि बुवाई की अवधि समाप्त होने से पहले उन्हें आवश्यक बीज उपलब्ध कराए जा सकें।

देश में 11.2 प्रतिशत अतिरिक्त बीज उपलब्ध

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चालू खरीफ सीजन के लिए देश में प्रमाणित बीजों की उपलब्धता 192.43 लाख क्विंटल है, जबकि कुल अनुमानित आवश्यकता लगभग 173 लाख क्विंटल है। इस प्रकार देश में करीब 11.2 प्रतिशत अतिरिक्त बीज उपलब्ध हैं।

भारत में बीज आपूर्ति में निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। निजी कंपनियां देशभर में 10 लाख से अधिक खुदरा विक्रेताओं के नेटवर्क के जरिए करीब 70 प्रतिशत बीजों की आपूर्ति करती हैं। इन कंपनियों ने इस वर्ष अतिरिक्त बफर स्टॉक भी तैयार किया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत आपूर्ति की जा सके।

अल-नीनो और कमजोर मानसून चिंता का कारण

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस वर्ष अल-नीनो की स्थिति भारतीय कृषि के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। सरकार ने 12 राज्यों के 315 ऐसे जिलों की पहचान की है, जो कमजोर या देरी से आने वाले मानसून से प्रभावित हो सकते हैं।

अजय राणा ने कहा कि भारत की लगभग 50 प्रतिशत खेती आज भी वर्षा पर निर्भर है। ऐसे में अल-नीनो का प्रभाव खरीफ फसलों पर गंभीर असर डाल सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई सुविधाएं सीमित हैं।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों में बुवाई पहले ही प्रभावित होने लगी है, जबकि पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे सिंचित क्षेत्रों में बुवाई की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है।

जल्दी तैयार होने वाली किस्मों पर बढ़ रहा जोर

कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए किसान अब जल्दी और मध्यम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। बीज कंपनियों ने भी इसी मांग को ध्यान में रखते हुए कम अवधि वाली और जलवायु अनुकूल किस्मों का भंडारण बढ़ाया है।

एफएसआईआई सदस्य कंपनियों ने रिमोट सेंसिंग तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संवेदनशील जिलों की निगरानी शुरू कर दी है। उद्योग का मानना है कि इस समय सबसे बड़ी चुनौती अतिरिक्त भंडार वाले क्षेत्रों से जरूरतमंद जिलों तक बीजों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

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