9 Jun 2026, Tue

कॉकरोच जनता पार्टी के बाद लॉन्च हुई ‘इश्क करो पार्टी’, SC के पूर्व जज ने किया ऐलान; ईमेल आईडी भी शेयर किया

नई दिल्ली: देश की सियासत और सोशल मीडिया पर इन दिनों एक अनोखी राजनीतिक पहल चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने “IKP यानी इश्क करो पार्टी” की शुरुआत करने का ऐलान किया है। इस घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक बहस छिड़ गई है।

पार्टी की शुरुआत और सदस्यता अभियान

मार्कण्डेय काटजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करते हुए इस नई पहल की जानकारी दी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि जो भी इस अभियान से जुड़ना चाहते हैं, वे ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए उन्होंने एक आधिकारिक ईमेल आईडी भी जारी की है।

उनके अनुसार, यह केवल एक प्रतीकात्मक या मजाकिया पहल नहीं है, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन है जिसका उद्देश्य समाज में एकता और प्रेम का संदेश फैलाना है।

सामाजिक समस्याओं पर फोकस का दावा

काटजू ने अपने बयान में कहा कि देश आज कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, जिनमें गरीबी, बेरोजगारी, कुपोषण, महंगी शिक्षा, खराब स्वास्थ्य सेवाएं और महंगाई प्रमुख हैं। उनका मानना है कि इन समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब समाज में एकता और आपसी सहयोग बढ़े।

उन्होंने यह भी कहा कि समाज जाति और धर्म के आधार पर बंटा हुआ है और राजनीतिक दल अक्सर इसे अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करते हैं। ‘इश्क करो पार्टी’ का उद्देश्य इस विभाजन को खत्म कर लोगों में भाईचारा और प्रेम बढ़ाना है।

सोशल मीडिया पर पहले से चर्चा में CJP

इस बीच सोशल मीडिया पर “कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)” भी लगातार चर्चा में बनी हुई है। हाल ही में इस संगठन ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया था, जिसके बाद यह सुर्खियों में आया।

CJP फाउंडर पर काटजू का तंज

मार्कण्डेय काटजू ने अपनी पोस्ट में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उनकी मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बात शामिल होना व्यावहारिक समाधान नहीं है।

काटजू ने तंज कसते हुए कहा कि सिर्फ मंत्री बदलने से व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता, क्योंकि उनकी जगह कोई और नियुक्त हो जाता है।

निष्कर्ष

‘इश्क करो पार्टी’ की घोषणा ने एक बार फिर मार्कण्डेय काटजू को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जहां कुछ लोग इसे व्यंग्यात्मक पहल मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे सामाजिक एकता का संदेश देने वाला प्रयास बता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस पहल को लेकर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

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