भारत में डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कराधान और अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2026 और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन से जुड़े कानून को मंजूरी दे दी है। विधि मंत्रालय की ओर से 17 अगस्त को जारी राजपत्र अधिसूचना के मुताबिक, संसद से पारित इन विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। संसद ने दोनों विधेयकों को 10 अगस्त को पारित किया था।
भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में किए गए संशोधन का असर खास तौर पर UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन पर पड़ सकता है। इस संशोधन से सरकार को जीरो मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी Zero MDR व्यवस्था में भविष्य में बदलाव करने के लिए कानूनी आधार मिल गया है।
UPI और RuPay पर MDR को लेकर क्या बदलेगा?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारी लेनदेन के लिए भुगतान प्रणाली से जुड़े पक्षों को देते हैं। फिलहाल UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर जीरो MDR व्यवस्था लागू है।
नए संशोधन के बाद सरकार अधिसूचना के जरिए यह तय कर सकेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों या किन श्रेणियों के लेनदेन पर MDR शुल्क नहीं लगेगा। यानी भविष्य में सभी प्रकार के डिजिटल लेनदेन के लिए एक समान व्यवस्था के बजाय सरकार अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर नियम तय कर सकती है।
आम लोगों के लिए UPI रहेगा फ्री
हालांकि, इस बदलाव को लेकर आम UPI यूजर्स के लिए फिलहाल राहत की बात है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में विधेयक पर चर्चा के दौरान स्पष्ट किया था कि उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा।
उन्होंने कहा था कि भविष्य में MDR शुल्क अगर लागू किया जाता है तो यह केवल कुछ निश्चित श्रेणियों के कारोबारी लेनदेन पर लागू होगा। इसका मतलब है कि सामान्य यूजर्स को UPI से भुगतान करने के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
MDR पर फैसला लेगी UPI संचालन समिति
MDR से जुड़े नियमों और शुल्क के संबंध में आगे निर्णय NPCI की अध्यक्षता वाली UPI और सेवा संचालन समिति की भूमिका के तहत लिया जाएगा। इससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम में अलग-अलग श्रेणियों के लेनदेन के लिए शुल्क व्यवस्था तय करने का रास्ता खुल सकता है।
Taxation Amendment Act का भी असर
राष्ट्रपति की मंजूरी पाने वाले दूसरे कानून यानी कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2026 का उद्देश्य विदेशी निवेश आकर्षित करने, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारत में डेटा सेंटर के इस्तेमाल को आसान बनाना है।
यह कानून 5 जून 2026 को जारी अध्यादेश की जगह लेगा। उस अध्यादेश के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की ब्याज आय और पूंजीगत लाभ को आयकर से छूट देने का प्रावधान किया गया था।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा
नए कानून में विदेशी कंपनियों के लिए भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग पर मिलने वाली आयकर छूट को वित्त वर्ष 2040-41 तक बढ़ाया गया है। इसके दायरे में मोबाइल फोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और उनके प्रमुख कलपुर्जे एवं सहायक उपकरण शामिल हैं।
कुल मिलाकर, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद दोनों कानून लागू होने की दिशा में आगे बढ़ गए हैं। एक तरफ UPI और RuPay के MDR नियमों में संभावित बदलाव का रास्ता खुला है, वहीं दूसरी ओर सरकार विदेशी निवेश और भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।

