वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक रिपोर्ट ने पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले के विकल्प पर विचार कर रहा है और सप्ताहांत तक संभावित कार्रवाई की तैयारी के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इस संबंध में अमेरिका की ओर से किसी नए हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि प्रस्तावित सैन्य दबाव का उद्देश्य ईरान को अमेरिका की शर्तों के अनुरूप वार्ता की मेज पर लाना हो सकता है। यह खबर ऐसे समय सामने आई है जब दोनों देशों के बीच सुरक्षा, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर तनाव पहले से ही बना हुआ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कैंप डेविड में हुई एक बैठक के दौरान ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने कहा कि अमेरिका आवश्यक होने पर सख्त कार्रवाई करेगा और ईरान पर दबाव बढ़ाया जाएगा। हालांकि, उन्होंने किसी संभावित सैन्य अभियान के समय या स्वरूप को लेकर सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी नहीं दी।
इसी बीच CBS की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी प्रशासन ईरान के ऊर्जा ढांचे, जैसे बिजली उत्पादन केंद्रों और पेट्रोलियम रिफाइनरियों को निशाना बनाने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। हालांकि, इस तरह की किसी कार्रवाई को लेकर भी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यदि किसी सैन्य अभियान में नागरिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाया जाता है, तो इसके गंभीर कानूनी और मानवीय परिणाम हो सकते हैं।
इन रिपोर्टों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हलचल देखने को मिली। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और ऊर्जा कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने मीडिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान को अपने कदमों की कीमत चुकानी होगी और अमेरिका सार्थक वार्ता चाहता है। हालांकि, उन्होंने भी किसी नए सैन्य अभियान की औपचारिक पुष्टि नहीं की।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव की आशंका बढ़ने से केवल क्षेत्रीय सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार मार्गों पर भी असर पड़ सकता है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल और गैस आपूर्ति दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फिलहाल स्थिति पर दुनिया की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं, कूटनीतिक प्रयास और सैन्य गतिविधियां इस संकट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

