Iran और United States के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। सीजफायर की मियाद खत्म होने के बाद दोनों देशों के बीच टकराव कम होने के बजाय और गहराता जा रहा है। इस बीच Donald Trump ने NATO देशों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि वे किसी भी हाल में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने में मदद न करें।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अगर ईरान को परमाणु हथियार मिलते हैं, तो वह उनका इस्तेमाल पहले Israel, फिर पूरे मध्य पूर्व और बाद में यूरोप के खिलाफ कर सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि इसका अगला निशाना अमेरिका भी हो सकता है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “ऐसा होने नहीं दिया जाएगा,” और यह वैश्विक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार बढ़ा रहा है, हालांकि उन्होंने अपने बयान में अतिरंजित आंकड़े भी पेश किए। साथ ही उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका ने कड़े आर्थिक दबाव के जरिए उन्हें दवाओं की कीमतों को लेकर झुकने पर मजबूर किया। इस टिप्पणी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
ईरान के साथ संभावित समझौते पर बात करते हुए ट्रंप ने साफ कहा कि वह तेहरान के प्रस्तावों से संतुष्ट नहीं हैं। उनके अनुसार, बातचीत में देरी और अस्पष्टता इस बात का संकेत है कि ईरान गंभीरता से समझौता नहीं करना चाहता। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका किसी अधूरे समझौते के साथ आगे नहीं बढ़ेगा, जिससे भविष्य में फिर से संकट खड़ा हो जाए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “हम दुनिया को खतरे में नहीं डालेंगे। अगर ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति दी गई, तो यह पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन जाएगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका इस मुद्दे का स्थायी समाधान चाहता है, न कि अस्थायी राहत।
तेल की बढ़ती कीमतों पर भी ट्रंप ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में अन्य चीजों की कीमतें तो नियंत्रण में हैं, लेकिन पेट्रोल की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। उनका मानना है कि जब ईरान से जुड़ा यह संकट खत्म होगा, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता लौटेगी।
इस बीच व्हाइट हाउस ने कांग्रेस को जानकारी दी है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के बावजूद वह इस संघर्ष को “समाप्त” मानता है, लेकिन ट्रंप के बयानों से यह स्पष्ट है कि स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें इस बात का पूरा भरोसा नहीं है कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई ठोस समझौता हो पाएगा।
कुल मिलाकर, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता यह तनाव न केवल मध्य पूर्व, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। आने वाले समय में कूटनीतिक प्रयासों की दिशा और दोनों देशों के रुख पर ही इस संकट का भविष्य निर्भर करेगा।

