16 Jun 2026, Tue

US-Iran War LIVE: ईरान परमाणु हथियार नहीं रखेगा, बोले ट्रंप, डील से नाराज नेतन्याहू, अब आगे क्या होगा?

 

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय से चल रहे ईरान और अमेरिका के तनाव के बीच अब दोनों देशों ने संघर्ष विराम और शांति प्रस्ताव पर सहमति जताई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समझौते के बाद दोनों देश एक-दूसरे पर हमले नहीं करेंगे और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खोला जाएगा।

इस डील को वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है, हालांकि इससे कई नए राजनीतिक सवाल भी खड़े हो गए हैं।


ट्रंप का बड़ा दावा – ईरान नहीं रखेगा परमाणु हथियार

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान इस समझौते के तहत यह मानने को तैयार हो गया है कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार नहीं रखेगा। ट्रंप के अनुसार यह समझौता क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह समझौता कई दौर की बातचीत के बाद संभव हुआ है, और इसका मकसद पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को खत्म करना है।


स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी सहमति

रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने सशर्त रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने पर भी सहमति जताई है। यह वही समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार गुजरता है। इस रास्ते के खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है।


जिनेवा में होगा समझौते पर हस्ताक्षर

जानकारी के मुताबिक, इस MoU (Memorandum of Understanding) पर औपचारिक हस्ताक्षर इस हफ्ते के अंत में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में किए जाएंगे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस तकनीकी बातचीत की अगुवाई करेंगे और हस्ताक्षर समारोह में भी शामिल होंगे।

एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप स्वयं इस समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहते थे ताकि वह इस ऐतिहासिक डील में अपनी सीधी भूमिका दिखा सकें।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी संकेत दिए हैं कि समझौते के बाद दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत का पहला दौर भी जिनेवा में ही आयोजित किया जाएगा।


नेतन्याहू की नाराजगी और इजरायल की चिंता

इस समझौते से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू नाराज बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इजरायल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी प्राथमिकता है।

नेतन्याहू ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि वह दशकों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने साफ कहा कि चाहे समझौता हो या न हो, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने दिए जाएंगे।


अब आगे क्या होगा?

इस समझौते के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि मध्य पूर्व की भू-राजनीति किस दिशा में जाएगी। जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ इजरायल की चिंता बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील अगर पूरी तरह लागू होती है तो:

  • पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव कम हो सकता है
  • तेल बाजार में स्थिरता आ सकती है
  • लेकिन इजरायल और अमेरिका के बीच रणनीतिक मतभेद बढ़ सकते हैं

फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें जिनेवा में होने वाले हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हुई हैं, जहां इस ऐतिहासिक समझौते का भविष्य तय होगा।

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