नई दिल्ली: देश की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का पहला हिस्सा वर्ष 2027 में यात्रियों के लिए शुरू होने की उम्मीद है। शुरुआती चरण में गुजरात के सूरत और वापी के बीच करीब 97 किलोमीटर लंबे सेक्शन पर ट्रेन चलाने की योजना है। पूरा कॉरिडोर तैयार होने के बाद बुलेट ट्रेन गुजरात और महाराष्ट्र के प्रमुख औद्योगिक एवं व्यावसायिक शहरों को तेज रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।
राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी NHSRCL के अनुसार, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 508 किलोमीटर है। इसमें गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली का संयुक्त हिस्सा लगभग 352 किलोमीटर तथा महाराष्ट्र का हिस्सा 156 किलोमीटर है। परियोजना के तहत नदी पुलों, स्टेशनों, सुरंगों, वायाडक्ट और स्टील ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है।
रूट पर बनाए जाएंगे कुल 12 स्टेशन
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन रूट पर कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। गुजरात में साबरमती, अहमदाबाद, आणंद-नडियाद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा और वापी स्टेशन बनाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र में बोइसर, विरार, ठाणे और मुंबई स्टेशन होंगे। इस तरह गुजरात में आठ और महाराष्ट्र में चार स्टेशन बनाए जाएंगे।
अहमदाबाद से मुंबई की दिशा में यात्रा करने पर ट्रेन साबरमती से शुरू होकर अहमदाबाद, आणंद-नडियाद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोइसर, विरार और ठाणे होते हुए मुंबई पहुंचेगी। सभी स्टेशनों को संबंधित शहरों की स्थानीय पहचान और संस्कृति के आधार पर विशेष डिजाइन देने की योजना है।
सूरत-वापी के बीच शुरू होगा पहला परिचालन
रेलवे की मौजूदा योजना के मुताबिक, परियोजना का पहला परिचालन चरण अगस्त 2027 में शुरू किया जा सकता है। शुरुआती सेवा सूरत से वापी के बीच चलाने की तैयारी है। इस सेक्शन की लंबाई करीब 97 किलोमीटर बताई गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी पहले चरण को 2027 में शुरू करने की बात कह चुके हैं। हालांकि, अंतिम तारीख निर्माण कार्य, सुरक्षा परीक्षण और जरूरी मंजूरियों के पूरा होने पर निर्भर करेगी।
320 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी रफ्तार
कॉरिडोर पर ट्रेनों की अधिकतम परिचालन गति करीब 320 किलोमीटर प्रति घंटा रखने की योजना है। सीमित स्टॉप वाली सेवा से मुंबई और अहमदाबाद की यात्रा करीब दो घंटे में पूरी होने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार, परियोजना के पूरा होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय लगभग दो घंटे सात मिनट तक रह सकता है। वर्तमान रेल सेवाओं की तुलना में इससे यात्रियों का काफी समय बचेगा।
जापानी शिंकानसेन तकनीक पर आधारित परियोजना
इस परियोजना की आधारशिला सितंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने रखी थी। कॉरिडोर को जापान की शिंकानसेन हाई-स्पीड रेल तकनीक के आधार पर विकसित किया जा रहा है। भारत और जापान के बीच अगली पीढ़ी की E10 शिंकानसेन तकनीक को परियोजना में शामिल करने पर भी चर्चा हुई है।
परियोजना को पहले दिसंबर 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन भूमि अधिग्रहण, निर्माण संबंधी चुनौतियों और अन्य कारणों से इसमें देरी हुई। अब चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग हिस्सों को चालू करने की तैयारी की जा रही है। पूरा कॉरिडोर शुरू होने के बाद इससे व्यापार, पर्यटन, रोजगार और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

