हरियाणा की राजनीति में सोनीपत मेयर चुनाव से ठीक पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार कमल दीवान ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। बताया जा रहा है कि पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी के चलते उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया है। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, बुधवार को कांग्रेस ने पूरे जोर-शोर के साथ कमल दीवान का नामांकन दाखिल कराया था। इस मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद दीपेंद्र हुड्डा, हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सहित कई बड़े नेता मौजूद थे। इससे यह संकेत मिला था कि पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। लेकिन नामांकन के कुछ ही समय बाद उम्मीदवार का पीछे हटना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला कांग्रेस के अंदर गहराते मतभेदों को उजागर करता है। पार्टी के भीतर लंबे समय से गुटबाजी की चर्चा रही है, और अब यह मुद्दा खुले तौर पर सामने आ गया है। स्थानीय स्तर पर कई नेता उम्मीदवार चयन से असंतुष्ट बताए जा रहे थे, जिसका असर अब साफ दिखाई दे रहा है।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इस मौके का फायदा उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। बीजेपी ने एक बार फिर अपने मौजूदा उम्मीदवार राजी जैन पर भरोसा जताया है। पिछले उपचुनाव में भी राजी जैन ने कांग्रेस को बड़े अंतर से हराया था, जिससे उनका आत्मविश्वास काफी मजबूत है। ऐसे में कांग्रेस के उम्मीदवार के पीछे हटने से बीजेपी को चुनावी बढ़त मिलती नजर आ रही है।
हालांकि, इस बार का चुनावी परिदृश्य पिछले चुनाव से अलग माना जा रहा है। जहां एक ओर बीजेपी अपनी जीत को दोहराने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस को अब नए सिरे से उम्मीदवार तय करना होगा। समय कम होने के कारण पार्टी के सामने चुनौती और भी बड़ी हो गई है।
स्थानीय राजनीतिक माहौल में इस फैसले का असर साफ दिख रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल है, जबकि विपक्षी दल इसे कांग्रेस की कमजोरी के रूप में पेश कर रहे हैं। आम मतदाताओं के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि जब पार्टी अपने उम्मीदवार को लेकर ही एकमत नहीं है, तो वह चुनाव में किस तरह मजबूती से मुकाबला करेगी।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कांग्रेस इस स्थिति से कैसे निपटती है। क्या पार्टी जल्द ही नया उम्मीदवार घोषित कर पाएगी या फिर यह असमंजस उसकी चुनावी संभावनाओं को और कमजोर करेगा। वहीं बीजेपी इस मौके को अपने पक्ष में भुनाने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है।
कुल मिलाकर, सोनीपत मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस में उभरी यह अंदरूनी कलह चुनावी समीकरण बदल सकती है। आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति और नए फैसले ही तय करेंगे कि वह इस संकट से उबर पाती है या नहीं।

