दिल्लीवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राजधानी में मेट्रो नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए दिल्ली मेट्रो फेज-4 के तहत इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ तक बनने वाले नए कॉरिडोर का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सराय रोहिल्ला मेट्रो स्टेशन परिसर में इस अहम परियोजना का शिलान्यास किया। इस कॉरिडोर के तैयार होने के बाद मध्य दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और पुरानी दिल्ली के बीच सफर पहले से ज्यादा आसान, तेज और सुविधाजनक हो जाएगा।
यह नया कॉरिडोर दिल्ली मेट्रो नेटवर्क की बड़ी विस्तार योजना का हिस्सा है। केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में दिल्ली मेट्रो फेज-4 के तहत इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ और लाजपत नगर-साकेत जी ब्लॉक कॉरिडोर को मंजूरी दी थी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर की कुल लंबाई 12.377 किलोमीटर होगी। इसमें 11.349 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत और 1.028 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा। इस कॉरिडोर पर कुल 10 स्टेशन बनाए जाने हैं।
डीएमआरसी की इस परियोजना से राजधानी के कई घनी आबादी वाले इलाकों को सीधा फायदा मिलेगा। यह रूट इंद्रलोक, दया बस्ती, सराय रोहिल्ला, अजमल खान पार्क, झंडेवालान, नबी करीम, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, दिल्ली गेट और दिल्ली सचिवालय-आईजी स्टेडियम क्षेत्र को जोड़ेगा। इससे रोजाना बड़ी संख्या में सफर करने वाले यात्रियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलेगी।
इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि दिल्ली सचिवालय को पहली बार सीधी मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी। अभी सचिवालय जाने वाले यात्रियों को आईटीओ या आसपास के स्टेशनों पर उतरने के बाद ऑटो, ई-रिक्शा या कैब का सहारा लेना पड़ता है। नया स्टेशन बनने के बाद लोग सीधे मेट्रो से सचिवालय और आईजी स्टेडियम क्षेत्र तक पहुंच सकेंगे।
इंद्रलोक और नई दिल्ली स्टेशन भी इस प्रोजेक्ट के बाद बड़े इंटरचेंज हब के रूप में उभरेंगे। नई दिल्ली स्टेशन पर पहले से येलो लाइन और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन की सुविधा मौजूद है। नए कॉरिडोर के जुड़ने के बाद यहां यात्रियों को और बेहतर इंटरचेंज विकल्प मिलेंगे। वहीं इंद्रलोक स्टेशन पर रेड लाइन, ग्रीन लाइन और नए कॉरिडोर के बीच कनेक्टिविटी यात्रियों की यात्रा को आसान बनाएगी।
इस परियोजना का निर्माण चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा घनी आबादी और व्यस्त इलाकों के नीचे से गुजरेगा। भूमिगत सुरंग निर्माण के दौरान यातायात, पुराने ढांचे और स्थानीय आबादी को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
नए कॉरिडोर के शुरू होने से सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद है। इससे जाम, प्रदूषण और यात्रा समय में कमी आ सकती है। पुरानी दिल्ली, करोल बाग, सराय रोहिल्ला, दया बस्ती और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जैसे क्षेत्रों में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। यह कॉरिडोर दिल्ली मेट्रो को और ज्यादा इंटरकनेक्टेड और यात्रियों के लिए सुविधाजनक बनाएगा।

