नई दिल्ली: संसद की विभाग-संबंधी स्थायी समितियों का पुनर्गठन किया गया है। इस बदलाव के तहत कई समितियों के अध्यक्षों की जिम्मेदारियों में फेरबदल हुआ है। पुनर्गठन में वाणिज्य से जुड़ी स्थायी समिति की अध्यक्षता में बदलाव हुआ है। अब इस समिति की कमान भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुधांशु त्रिवेदी को सौंपी गई है। इससे पहले यह जिम्मेदारी तृणमूल कांग्रेस की सांसद डोला सेन के पास थी।
केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स से संबंधित स्थायी समिति की अध्यक्षता भी बदली गई है। इस समिति की नई अध्यक्ष काकोली घोष दस्तीदार बनी हैं। उन्होंने कीर्ति आजाद की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है। इस तरह दोनों समितियों के नेतृत्व में बदलाव हुआ है और नए अध्यक्षों को समितियों के कामकाज की जिम्मेदारी दी गई है।
संसदीय स्थायी समितियां संसद के कामकाज का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। ये समितियां अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों से संबंधित नीतियों, योजनाओं, बजट और कामकाज की समीक्षा करती हैं। समितियां संबंधित मंत्रालयों से जानकारी मांग सकती हैं और विभिन्न विषयों पर अपनी रिपोर्ट तथा सिफारिशें संसद के सामने रखती हैं। ऐसे में इनके अध्यक्षों की भूमिका समितियों के कामकाज के संचालन में महत्वपूर्ण होती है।
कई समितियों के अध्यक्षों की जिम्मेदारी बरकरार
पुनर्गठन के दौरान सभी समितियों के अध्यक्षों में बदलाव नहीं किया गया है। कुछ विपक्षी दलों के सांसदों को उनकी मौजूदा समितियों की जिम्मेदारी पर बरकरार रखा गया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर विदेश मामलों से संबंधित समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे। वहीं चरणजीत सिंह चन्नी के पास कृषि से जुड़ी समिति की अध्यक्षता जारी रहेगी।
कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक को शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल से संबंधित समिति की जिम्मेदारी पर बरकरार रखा गया है। समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़ी समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे।
DMK सांसदों की जिम्मेदारी भी जारी
पुनर्गठन में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के सांसद तिरुचि शिवा और कनिमोझी की अध्यक्षता में भी बदलाव नहीं किया गया है। तिरुचि शिवा उद्योग से संबंधित समिति की अध्यक्षता संभालते रहेंगे, जबकि कनिमोझी खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण से जुड़ी समिति की अध्यक्ष बनी रहेंगी।
संसदीय समितियों के पुनर्गठन में सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दलों के सांसदों को भी अलग-अलग समितियों में जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें जनता दल यूनाइटेड, शिवसेना और तेलुगु देशम पार्टी से जुड़े सांसदों की मौजूदा जिम्मेदारियों को भी जारी रखा गया है।
समितियों के कामकाज पर रहेगा ध्यान
नई जिम्मेदारियों के साथ अब संबंधित अध्यक्ष अपने-अपने मंत्रालयों और विभागों से जुड़े विषयों पर समितियों की बैठकों का संचालन करेंगे। इन समितियों के सामने मंत्रालयों की नीतियों, योजनाओं और बजट से जुड़े मुद्दों की समीक्षा का काम रहता है। इसके अलावा समितियां विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से जानकारी लेकर विभिन्न विषयों पर विचार कर सकती हैं।
संसदीय समितियों का उद्देश्य सदन के कामकाज को अधिक विस्तृत और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है। इनके माध्यम से विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की जांच और समीक्षा की जाती है। हालिया पुनर्गठन के बाद जिन सांसदों को नई जिम्मेदारियां मिली हैं, वे अब संबंधित समितियों के आगामी कामकाज का संचालन करेंगे।

