दिल्ली में यमुना नदी के पुनर्जीवन और फ्लडप्लेन विकास कार्यों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की समीक्षा बैठक में उप-राज्यपाल ने परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को तय समयसीमा में कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।
यमुना को पर्यावरणीय जीवनरेखा के रूप में विकसित करने पर जोर
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि यमुना नदी दिल्ली के लिए केवल एक जल स्रोत नहीं बल्कि एक पर्यावरणीय जीवनरेखा है। इस कारण बाढ़ नियंत्रण, नदी संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और पर्यावरणीय संतुलन जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
उप-राज्यपाल ने कहा कि सभी परियोजनाओं को एकीकृत और परिणाम-आधारित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि यमुना का पारिस्थितिक संतुलन बहाल हो सके।
1,700 हेक्टेयर फ्लडप्लेन में बहाली का काम पूरा
अधिकारियों के अनुसार यमुना के लगभग 1,700 हेक्टेयर फ्लडप्लेन क्षेत्र में बहाली और रिवरफ्रंट विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। इस दौरान बड़ी मात्रा में कचरा हटाया गया है, जिसमें शामिल है—
- 88,574 मीट्रिक टन निर्माण और ध्वस्तीकरण मलबा
- 4,998 मीट्रिक टन नगर निगम का कचरा
इसके साथ ही लगभग 1,425 एकड़ भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर सुरक्षित किया गया है।
लाखों पौधों का रोपण और वेटलैंड विकास
पर्यावरण सुधार अभियान के तहत अब तक बड़े पैमाने पर हरियाली बढ़ाने का काम किया गया है।
- 7 लाख से अधिक देशी पेड़ लगाए गए
- 1 करोड़ से ज्यादा नदी तटीय घास और आर्द्रभूमि पौधों का रोपण
- 35 वेटलैंड विकसित किए गए
इन प्रयासों से जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इकोलॉजिकल डेस्टिनेशन बन रहे नए आकर्षण
बैठक में असिता, बानसेरा, अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क, यमुना वनस्थली, कालिंदी अविरल और यमुना वाटिका जैसी परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई।
इन स्थानों को पहले उपेक्षित और प्रदूषित क्षेत्रों से बदलकर अब हरित और पर्यावरणीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
32 ऐतिहासिक घाटों के संरक्षण की योजना
यमुना नदी की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए यमुना बाजार क्षेत्र में स्थित 32 ऐतिहासिक घाटों के पुनर्विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस संबंध में INTACH की रिपोर्ट में धरोहर संरक्षण, पैदल मार्ग, लैंडस्केपिंग और बेहतर कनेक्टिविटी के सुझाव दिए गए हैं।
निष्कर्ष
यमुना पुनर्जीवन परियोजना न केवल दिल्ली के पर्यावरण को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को भी पुनर्जीवित करने की कोशिश है। आने वाले समय में इन प्रयासों से दिल्ली को बाढ़ से सुरक्षा, स्वच्छ पर्यावरण और नए पर्यटन स्थलों का लाभ मिलने की उम्मीद है।

