5 Aug 2026, Wed

गुजरात में चांदीपुरा वायरस से हाहाकार, 22 बच्चों की मौत, सभी की उम्र 15 साल से कम; जानें इसके लक्षण और बचाव

गुजरात में चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) का संक्रमण तेजी से फैल रहा है और इसने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में अब तक 22 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 184 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें से 35 मरीजों में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि हुई है, जबकि 11 नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है। बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को सतर्क रहने और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने वायरस की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में संक्रमित बच्चों का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और बच्चों में गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है।

15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की हुई मौत

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिन 22 बच्चों की मौत हुई है, उनकी उम्र 15 वर्ष से कम थी। अधिकारियों का कहना है कि यह वायरस मुख्य रूप से बच्चों को अधिक प्रभावित कर रहा है, इसलिए अभिभावकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

वर्तमान में गांधीनगर, साबरकांठा (हिम्मतनगर), पाटन, राजकोट और भावनगर के सरकारी अस्पतालों में संक्रमित बच्चों का उपचार जारी है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 7 पॉजिटिव मरीज अभी अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 6 मरीजों की स्थिति में सुधार होने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई है

लोगों से सतर्क रहने की अपील

सरकार ने लोगों से अपील की है कि यदि बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, सुस्ती, बेहोशी, दौरे या अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में संपर्क करें।

स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण और प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी अभियान तेज कर दिया है। साथ ही स्थानीय प्रशासन को सफाई व्यवस्था, कीट नियंत्रण और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (रेत मक्खी) और कुछ अन्य कीटों के माध्यम से फैलती है। यह वायरस मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफलाइटिस) पैदा कर सकता है, जिससे मरीज की हालत तेजी से गंभीर हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस कुछ परिस्थितियों में एडीज मच्छर में भी पाया गया है। हालांकि इसका प्रमुख वाहक सैंडफ्लाई को माना जाता है। संक्रमण के बाद बच्चों में तेज बुखार और मस्तिष्क संबंधी लक्षण तेजी से विकसित हो सकते हैं, इसलिए समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है।

पहली बार कब मिला था वायरस?

चांदीपुरा वायरस की पहचान 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गांव में हुई थी। उसी गांव के नाम पर इस वायरस का नाम रखा गया। इसके बाद समय-समय पर महाराष्ट्र, गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में इसके मामले सामने आते रहे हैं।

सरकार ने बढ़ाई निगरानी

गुजरात सरकार ने प्रभावित जिलों में सर्विलांस टीमों की तैनाती, संदिग्ध मामलों की जांच और अस्पतालों में विशेष चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार नमूनों की जांच कर रहा है और संक्रमण के स्रोत का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और इलाज इस बीमारी में सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को कीटों से बचाने के उपाय अपनाएं, आसपास सफाई रखें और किसी भी गंभीर लक्षण को नजरअंदाज न करें।

गुजरात में चांदीपुरा वायरस के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को सतर्क कर दिया है और आने वाले दिनों में संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी।

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