यमन में एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। देश में सऊदी अरब के समर्थन वाली सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव बढ़ने के बाद बड़े पैमाने पर लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में संघर्ष तेज होने के कारण 46 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। लोगों में डर का माहौल है और कई परिवार सुरक्षित इलाकों की तलाश में पलायन कर रहे हैं।
2022 के संघर्षविराम पर मंडराया खतरा
यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष को 2022 में हुए संघर्षविराम के बाद काफी हद तक नियंत्रित किया गया था। हालांकि, हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर उस नाजुक शांति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हूती विद्रोहियों की गतिविधियां लाल सागर के तट से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की ओर बढ़ने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है।
यमन की सरकार ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और आवाजाही की स्वतंत्रता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद की अपील की है। सरकार ने सऊदी अरब पर हुए नए हमलों की भी निंदा की है। बढ़ते तनाव के बीच आशंका है कि यदि स्थिति पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया तो संघर्षविराम पूरी तरह खत्म हो सकता है।
2014 में शुरू हुआ था गृहयुद्ध
यमन में मौजूदा संकट की जड़ें 2014 में शुरू हुए गृहयुद्ध से जुड़ी हैं। उस दौरान हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना समेत देश के कई हिस्सों पर अपना प्रभाव बढ़ा लिया था। इसके बाद संघर्ष में कई क्षेत्रीय शक्तियां भी शामिल हुईं और युद्ध लंबे समय तक चलता रहा।
2014 से 2021 के बीच चले इस संघर्ष में करीब डेढ़ लाख लोगों की जान जाने का अनुमान है। युद्ध के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए और देश में खाद्य संकट तथा मानवीय समस्याएं गहरा गईं। यमन पहले से ही अरब क्षेत्र के सबसे गरीब देशों में शामिल है।
46 हजार से ज्यादा लोगों ने छोड़े घर
हालिया हिंसा के बाद संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी ने बताया कि पिछले सप्ताह 46 हजार से अधिक लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। विस्थापन की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। बताया गया कि एक सप्ताह के दौरान विस्थापित लोगों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है और आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
लोग सुरक्षा की तलाश में अपने साथ जरूरी सामान लेकर सुरक्षित जगहों की ओर जा रहे हैं। कई परिवारों के पास लंबे समय तक रहने के लिए पर्याप्त संसाधन भी नहीं हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा असर
बढ़ते संघर्ष का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। विस्थापित होने वालों में डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ से जुड़े लोग भी शामिल हैं। कई इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बनाए रखना चुनौती बन गया है।
मोखा क्षेत्र में अस्पताल को किसी तरह चालू रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कर्मचारियों के पलायन से स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। यदि संघर्ष और तेज होता है तो आम लोगों के लिए भोजन, इलाज और सुरक्षित आश्रय जैसी बुनियादी जरूरतों का संकट और गंभीर हो सकता है।
फिलहाल यमन एक बार फिर बड़े मानवीय संकट की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि बढ़ता तनाव 2022 से बनी नाजुक शांति को पूरी तरह खत्म न कर दे।

