भारतीय सेना ने अपनी युद्ध क्षमता को और अधिक मजबूत करते हुए दो अत्याधुनिक स्वदेशी कॉम्बैट सिस्टम को शामिल किया है। इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट 6 (EP-6) के तहत सेना ने ULPGM प्रिसिजन म्यूनिशन और AGNIKAA VTOL-1 FPV कामिकाजे ड्रोन को अपने बेड़े में शामिल किया है। यह कदम न केवल सेना की स्ट्राइक क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
हैदराबाद में हुआ प्रदर्शन, दिखी नई युद्ध क्षमता
हैदराबाद में वेस्टर्न कमांड की मौजूदगी में इन दोनों सिस्टम्स का प्रदर्शन किया गया, जहां इनकी क्षमताओं को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह साफ संकेत है कि भारतीय सेना अब पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ आधुनिक और AI-आधारित युद्ध तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रही है।
इन दोनों सिस्टम्स को पूरी तरह भारत में डिजाइन, डेवलप और निर्मित किया गया है, जो “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
क्या है AGNIKAA VTOL-1 FPV ड्रोन?
AGNIKAA VTOL-1 FPV कामिकाजे ड्रोन एक अत्याधुनिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (VTOL) ड्रोन है। इसकी खास बात यह है कि इसे उड़ान भरने के लिए किसी रनवे की जरूरत नहीं होती, जिससे इसे पहाड़ी क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में आसानी से तैनात किया जा सकता है।
FPV (First Person View) तकनीक के जरिए ऑपरेटर रियल टाइम में लक्ष्य को देख सकता है और बेहद सटीक हमला कर सकता है। यह ड्रोन कम समय में तेजी से टारगेट तक पहुंचकर उसे नष्ट करने में सक्षम है।
कितना घातक है यह ड्रोन?
AGNIKAA VTOL-1 को ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि यह ड्रोन लंबे समय तक टारगेट एरिया में मंडराता रह सकता है और सही मौका मिलते ही सीधे लक्ष्य पर हमला कर खुद को विस्फोट के साथ नष्ट कर देता है।
इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं:
- कम रडार सिग्नेचर, जिससे इसे पकड़ना मुश्किल
- हाई प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता
- तेज और सटीक टारगेट हिटिंग
- दुश्मन के बंकर, रडार, कमांड पोस्ट और आतंकी ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ड्रोन आधुनिक युद्ध में गेम चेंजर साबित हो सकता है, खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों में।
ULPGM म्यूनिशन भी बढ़ाएगा ताकत
इसके साथ शामिल किया गया ULPGM प्रिसिजन म्यूनिशन भी सेना की स्ट्राइक क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाला सिस्टम है। यह कम लागत में सटीक हमला करने में सक्षम है और दुश्मन की फॉरवर्ड पोजिशन या आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए बेहद प्रभावी माना जा रहा है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
इन दोनों सिस्टम्स का शामिल होना भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता में बढ़ते आत्मनिर्भरता के संकेत देता है। इससे न केवल सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि विदेशी हथियारों पर निर्भरता भी कम होगी।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसे स्वदेशी सिस्टम भारतीय सेना को और अधिक आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाएंगे, जिससे देश की सुरक्षा व्यवस्था और भी सुदृढ़ होगी।

