आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की वैश्विक दौड़ ने दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों की तस्वीर बदल दी है। कभी गेमिंग ग्राफिक्स कार्ड बनाने के लिए पहचानी जाने वाली अमेरिकी टेक कंपनी Nvidia आज दुनिया की सबसे ताकतवर टेक कंपनियों में शामिल हो चुकी है। कंपनी का मार्केट कैप अब 5 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है, जो भारत के पूरे इक्विटी बाजार के कुल मार्केट कैप से भी ज्यादा है। यह उपलब्धि न सिर्फ Nvidia की जबरदस्त कारोबारी सफलता को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि आने वाले समय में AI तकनीक दुनिया की अर्थव्यवस्था और कारोबार को किस तरह प्रभावित करने वाली है।
भारतीय शेयर बाजार दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा इक्विटी बाजार माना जाता है, जिसका कुल मार्केट कैप करीब 5 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है। दूसरी ओर Nvidia अकेले इस आंकड़े को पार कर चुकी है। पिछले तीन सालों में कंपनी की वैल्यू में विस्फोटक बढ़ोतरी देखने को मिली है। कंपनी का शेयर, जो कभी 50 डॉलर से नीचे ट्रेड करता था, अब 211 डॉलर से ऊपर पहुंच चुका है। इस दौरान Nvidia के शेयर में 323 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है।
Nvidia की इस सफलता के पीछे उसकी रणनीतिक बदलावों की बड़ी भूमिका रही है। कंपनी ने समय रहते यह समझ लिया था कि आने वाला दौर AI आधारित कंप्यूटिंग का होगा। इसके बाद उसने अपने ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट यानी GPU को सिर्फ गेमिंग तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें AI मॉडल ट्रेनिंग और डेटा प्रोसेसिंग के लिए तैयार किया। आज दुनिया की ज्यादातर AI कंपनियां और क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर Nvidia की हाई-एंड चिप्स पर निर्भर हैं। यही वजह है कि Nvidia को अब ग्लोबल AI इंडस्ट्री की रीढ़ कहा जा रहा है।
OpenAI, Google, Microsoft और Meta जैसी कंपनियों के AI मॉडल्स को चलाने के लिए भारी कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है और Nvidia के GPU इस मांग को पूरा कर रहे हैं। AI डेटा सेंटर, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में कंपनी की चिप्स की भारी मांग बनी हुई है। इसी मांग ने Nvidia की कमाई और वैल्यू दोनों को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया है।
AI क्रांति का फायदा सिर्फ Nvidia को ही नहीं मिला है। Alphabet, Apple और Microsoft जैसी टेक कंपनियों की वैल्यू भी तेजी से बढ़ी है। इनमें से कई कंपनियां 4 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट वैल्यू के करीब पहुंच चुकी हैं। वहीं Amazon, Meta, Tesla, Broadcom, TSMC और Samsung जैसी कंपनियां भी AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर की वजह से 1 ट्रिलियन डॉलर क्लब में शामिल हो गई हैं।
दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है। 2024 में भारतीय बाजार का मार्केट कैप करीब 5.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली के कारण इसमें गिरावट देखने को मिली है। लगातार विदेशी निवेश निकलने से भारतीय कंपनियों के मार्केट कैप में कमी आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनने जा रहा है और Nvidia जैसी कंपनियां इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उठा रही हैं। AI आधारित तकनीकों की बढ़ती मांग के बीच टेक सेक्टर में निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।

