23 Apr 2026, Thu

नंदीग्राम हॉट सीट: BJP के दिग्गज शुभेंदु अधिकारी को मात दे सकेंगे TMC के पबित्र कर? किसके सिर सजेगा ताज

पश्चिम बंगाल की राजनीति में अहम मानी जाने वाली Nandigram विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। 2026 के चुनावी मुकाबले में यहां दिलचस्प राजनीतिक समीकरण देखने को मिल रहे हैं, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता Suvendu Adhikari के सामने अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार Pabitra Kar चुनौती बनकर खड़े हैं। खास बात यह है कि पबित्र कर पहले भाजपा में थे और कभी शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी माने जाते थे, लेकिन अब उन्होंने पाला बदलकर उन्हीं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

नंदीग्राम सीट का इतिहास हमेशा से राजनीतिक रूप से अहम रहा है। यह वही क्षेत्र है जहां से राज्य की सत्ता के समीकरण कई बार बदले हैं। अब तक यहां 15 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें शुरुआती दौर में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का दबदबा रहा और उसने नौ बार जीत हासिल की। इसके बाद कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने भी यहां अपनी पकड़ बनाई। भाजपा को इस सीट पर पहली बड़ी सफलता साल 2021 में मिली, जब शुभेंदु अधिकारी ने एक ऐतिहासिक मुकाबले में मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को हराया था।

2021 का चुनाव नंदीग्राम के इतिहास का सबसे चर्चित चुनाव रहा, जब ममता बनर्जी ने अपनी पारंपरिक सीट छोड़कर नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था। उस मुकाबले में शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें बेहद कम अंतर, करीब 1,956 वोटों से पराजित किया था। इस जीत ने भाजपा को राज्य की राजनीति में नई ताकत दी और शुभेंदु अधिकारी को एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया।

अब 2026 के चुनाव में पबित्र कर की एंट्री ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है। पबित्र कर का कहना है कि भाजपा में कार्यकर्ताओं की आवाज नहीं सुनी जा रही और नंदीग्राम में राजनीतिक द्वेष के कारण लोगों पर झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने खुद को टीएमसी का पुराना सदस्य बताते हुए कहा कि वे “अपने घर वापस लौटे हैं।” साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि 2021 में शुभेंदु अधिकारी की जीत के पीछे मजबूत संगठनात्मक ढांचा था, जिसमें उनका भी योगदान था।

दूसरी ओर, शुभेंदु अधिकारी के लिए यह चुनाव अपनी साख बचाने का भी है। वे नंदीग्राम को अपनी राजनीतिक पहचान मानते हैं और यहां उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। भाजपा के लिए भी यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल है, क्योंकि 2021 की जीत के बाद पार्टी यहां अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार नंदीग्राम में मुकाबला सीधा और कांटे का हो सकता है। एक तरफ शुभेंदु अधिकारी का मजबूत जनाधार और भाजपा की संगठनात्मक ताकत है, तो दूसरी तरफ पबित्र कर का स्थानीय कनेक्शन और टीएमसी का जमीनी नेटवर्क है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या पबित्र कर इस सीट पर बड़ा उलटफेर कर पाते हैं या फिर शुभेंदु अधिकारी अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखते हैं। नंदीग्राम का यह मुकाबला न सिर्फ स्थानीय बल्कि पूरे राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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