10 Jul 2026, Fri

देश के 10 रूटों पर चल रहा है हाइड्रोजन का ट्रायल, नितिन गडकरी बोले- परिवहन उद्योग का भविष्य है हाइड्रोजन

 

भारत में ग्रीन ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए सरकार तेजी से हाइड्रोजन फ्यूल पर काम कर रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि हाइड्रोजन आने वाले समय में ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री का भविष्य बन सकता है। उन्होंने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय देश के 10 प्रमुख रूटों पर हाइड्रोजन ट्रायल के लिए पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है।

हैदराबाद में आयोजित ‘प्रवास 5.0’ और ‘भारत प्रवास अवार्ड्स’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि भारत को स्वच्छ, सस्ता और टिकाऊ ईंधन विकल्पों की जरूरत है। उनके मुताबिक, हाइड्रोजन न सिर्फ प्रदूषण कम करने में मदद कर सकता है, बल्कि देश की फ्यूल इंपोर्ट निर्भरता को भी घटा सकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य का ईंधन हाइड्रोजन है और सरकार इसी दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रही है।

मंत्रालय जिन 10 रूटों पर हाइड्रोजन ट्रायल कर रहा है, उनमें ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, भुवनेश्वर-कोणार्क-पुरी, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, साहिबाबाद-फरीदाबाद-दिल्ली, पुणे-मुंबई, जमशेदपुर-कलिंगानगर, तिरुवनंतपुरम-कोच्चि, कोच्चि-एडापल्ली, जामनगर-अहमदाबाद और नेशनल हाईवे-16 पर विशाखापत्तनम-बैयावरम रूट शामिल हैं। इन रूटों पर हाइड्रोजन आधारित वाहनों और ईंधन की व्यवहारिकता, सुरक्षा, लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है।

गडकरी ने दिल्ली में कचरे से हाइड्रोजन बनाकर बसें चलाने की योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजधानी में नगर निगम के कचरे को अलग करके बायो-डाइजेस्टर के जरिए हाइड्रोजन तैयार की जा सकती है। इसी हाइड्रोजन से पब्लिक बसों को चलाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। अगर यह योजना सफल होती है, तो इससे दिल्ली के कचरा प्रबंधन और प्रदूषण, दोनों समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी की खासियत यह है कि इससे चलने वाले वाहनों में पारंपरिक डीजल-पेट्रोल वाहनों की तरह धुआं नहीं निकलता। फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली बनती है और उत्सर्जन के रूप में मुख्य रूप से पानी निकलता है। यही वजह है कि इसे जीरो-एमिशन मोबिलिटी की दिशा में अहम तकनीक माना जा रहा है।

सड़क परिवहन के साथ-साथ रेलवे भी हाइड्रोजन तकनीक की ओर कदम बढ़ा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रेल 17 जुलाई 2026 को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने जा रही है। यह ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलेगी। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखा सकते हैं। ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर आधारित होगी और इसका किराया 5 रुपये से 25 रुपये के बीच बताया जा रहा है।

कुल मिलाकर, हाइड्रोजन को लेकर सरकार की तैयारी भारत के ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बड़े बदलाव का संकेत देती है। अगर ये पायलट प्रोजेक्ट सफल रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में बसों, ट्रकों और ट्रेनों में हाइड्रोजन फ्यूल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है।

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