23 Sep 2026, Wed

छात्रा की NSA के तहत हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, ”नोएडा DM मेधा रूपम को अकेले जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते”

आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। मामला गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द करते हुए मुआवजे की राशि उनकी सैलरी से काटने का निर्देश दिया गया था।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नोएडा में हुए मजदूर प्रदर्शन के दौरान आकृति चौधरी की हिरासत से जुड़ा है। आकृति को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया था। अदालत ने उनकी रिहाई का निर्देश देने के साथ ही मुआवजे के तौर पर 5 लाख रुपये की राशि जिलाधिकारी की सैलरी से काटकर दिए जाने का आदेश दिया था। इसके बाद मेधा रूपम ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर सवाल उठाया कि हिरासत का फैसला अगर कई स्तरों पर अधिकारियों की रिपोर्ट और जांच के बाद लिया गया था, तो केवल जिलाधिकारी को इसके लिए अलग से जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि अगर निर्णय लेने की प्रक्रिया कई अधिकारियों से होकर गुजरी थी, तो मेधा रूपम को पूरी प्रक्रिया से अलग करके 5 लाख रुपये की जिम्मेदारी देना उचित नहीं माना जा सकता। इसके बाद पीठ ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

सरकार की ओर से क्या दलील दी गई?

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दलील दी गई कि जिलाधिकारी ने अपने स्तर पर अचानक हिरासत का फैसला नहीं लिया था। उनके सामने जो रिपोर्ट पहुंची, वह पुलिस विभाग के अलग-अलग अधिकारियों के स्तर से होकर आई थी। इसमें थाना स्तर से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक की प्रक्रिया शामिल होने की बात कही गई। यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत बनी सलाहकार व्यवस्था ने भी मामले को देखा था।

मेधा रूपम की ओर से पेश पक्ष ने भी दलील दी कि हिरासत का आदेश जारी करने से पहले कई स्तरों पर प्रक्रिया पूरी की गई थी। जिलाधिकारी के सामने उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी प्रावधानों के आधार पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले से यह स्पष्ट होगा कि हाई कोर्ट के आदेश में मेधा रूपम पर डाली गई व्यक्तिगत वित्तीय जिम्मेदारी को बरकरार रखा जाता है या उसमें बदलाव होता है।

कौन हैं मेधा रूपम?

मेधा रूपम 2014 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी हैं। उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की है। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिम्मेदारियां संभाली हैं। उनके करियर में बरेली, मेरठ, हापुड़ और कासगंज जैसे जिलों में काम करने का अनुभव भी शामिल है।

फिलहाल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार है। फैसला आने के बाद आकृति चौधरी की हिरासत और मेधा रूपम की व्यक्तिगत जिम्मेदारी से जुड़े कानूनी पहलुओं पर स्थिति और स्पष्ट होगी।

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