14 May 2026, Thu

कार्बाइड फ्री ऑर्गेनिक आम और कार्बाइट से पके आम में क्या अंतर होता है, देखने से नहीं खाने और स्वाद से पता चल जाएगा

गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में आम की बहार दिखाई देने लगती है, लेकिन अब आम खरीदना सिर्फ स्वाद का नहीं बल्कि सेहत का भी सवाल बन गया है। इन दिनों बाजारों में दो तरह के आम बिक रहे हैं—एक प्राकृतिक या ऑर्गेनिक तरीके से पके हुए और दूसरे कैल्शियम कार्बाइड जैसे केमिकल से जल्दी पकाए गए। देखने में दोनों आम लगभग एक जैसे लगते हैं, लेकिन इनके स्वाद, कीमत और स्वास्थ्य पर असर में बड़ा अंतर होता है। यही वजह है कि अब लोग आम खरीदते समय अधिक सतर्क रहने लगे हैं।

दिल्ली की गाजीपुर मंडी समेत कई बड़े फल बाजारों में इन दिनों ऑर्गेनिक और कार्बाइड से पके आम दोनों बिक रहे हैं। फल विक्रेताओं के अनुसार, बिना केमिकल वाले आमों की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उनकी कीमत भी ज्यादा है। ऑर्गेनिक तरीके से पकाए गए आम लगभग 150 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं, जबकि कार्बाइड से पके आम 80 रुपये किलो तक आसानी से मिल जाते हैं। कीमत में लगभग दोगुना अंतर होने के कारण कई लोग सस्ते आम खरीद लेते हैं, लेकिन यह सस्ता विकल्प सेहत पर भारी पड़ सकता है।

फल व्यापारियों का कहना है कि ऑर्गेनिक तरीके से आम पकाने में अधिक समय और मेहनत लगती है। इन आमों को प्राकृतिक तरीके से भूसे, तापमान और नियंत्रित वातावरण में पकाया जाता है। कुछ व्यापारी अब तकनीक का इस्तेमाल भी कर रहे हैं, जहां आम की पेटियों में स्कैनर लगाए जाते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि फल कार्बाइड मुक्त हैं। यही वजह है कि इन आमों की लागत बढ़ जाती है और बाजार में इनकी कीमत ज्यादा होती है।

दूसरी तरफ कार्बाइड से पके आम जल्दी तैयार हो जाते हैं। व्यापारी आम की पेटियों में कैल्शियम कार्बाइड की पुड़िया रख देते हैं, जिससे कुछ ही समय में फल पीले और आकर्षक दिखने लगते हैं। हालांकि बाहर से ये आम चमकदार और ताजे दिखाई देते हैं, लेकिन अंदर से पूरी तरह पके नहीं होते। कई बार इनमें प्राकृतिक मिठास और खुशबू भी नहीं होती।

विशेषज्ञों के अनुसार, कैल्शियम कार्बाइड स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। यह केमिकल एसीटिलीन गैस छोड़ता है, जो शरीर पर विषैले प्रभाव डाल सकती है। लंबे समय तक ऐसे फलों का सेवन करने से सिरदर्द, चक्कर, पेट संबंधी समस्याएं, त्वचा एलर्जी और तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ सकता है। कुछ मामलों में यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को भी बढ़ा सकता है।

ऑर्गेनिक और कार्बाइड से पके आमों में अंतर पहचानना आसान नहीं होता, लेकिन कुछ संकेत मदद कर सकते हैं। प्राकृतिक तरीके से पके आमों में खुशबू ज्यादा होती है और उनका रंग हल्का असमान दिखाई देता है। वहीं कार्बाइड वाले आम अक्सर ऊपर से एक जैसे पीले दिखते हैं लेकिन अंदर से कच्चे निकल सकते हैं। इसके अलावा प्राकृतिक आम का स्वाद ज्यादा मीठा और रसदार होता है।

खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ लोगों को सलाह दे रहे हैं कि आम खरीदते समय सिर्फ रंग और आकार देखकर फैसला न करें। संभव हो तो भरोसेमंद विक्रेता से ही फल खरीदें और खाने से पहले आम को अच्छी तरह पानी में धो लें। बढ़ती मिलावट के दौर में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव मानी जा रही है।

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