हुबली: कर्नाटक में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, जहां मुस्लिम धार्मिक नेताओं और उलेमाओं ने कांग्रेस सरकार से राज्य मंत्रिमंडल में समुदाय के 5 नेताओं को शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि मुस्लिम समुदाय ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का मजबूत समर्थन किया था, इसलिए अब सरकार में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
यह मांग हुबली के बेल्लीनगर स्थित हजरत सैयद फतेह शाह वली दरगाह में हुई एक बैठक के दौरान उठाई गई, जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम नेता और धार्मिक प्रतिनिधि मौजूद थे। बैठक में विशेष दुआ भी की गई और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा हुई।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए
बैठक में जिन नेताओं को मंत्री पद देने की मांग की गई, उनमें बी. जेड. जमीर अहमद खान, एन. ए. हैरिस, तनवीर सैत और सलीम अहमद के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं। नेताओं का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष यू. टी. खादर पहले ही एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर हैं, इसलिए बाकी चार वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी जानी चाहिए।
एक धार्मिक नेता ने सख्त शब्दों में कहा कि यदि समुदाय की यह मांग पूरी नहीं होती है तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
“समुदाय ने कांग्रेस को मजबूत समर्थन दिया”
उलेमाओं ने कहा कि मुस्लिम समुदाय ने हमेशा कांग्रेस का समर्थन किया है और सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक नेता ने कहा कि समुदाय वर्षों से कांग्रेस के साथ खड़ा है और अब उसे राजनीतिक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि ये नेता पिछले 35 से 40 वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं और अब उन्हें उचित सम्मान मिलना चाहिए।
आंदोलन की चेतावनी भी दी गई
बैठक में कुछ नेताओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि यदि 5 मुस्लिम नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा। एक वक्ता ने यहां तक कहा कि समुदाय अपनी “राजनीतिक ताकत” का प्रदर्शन करेगा।
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से अपील की कि वह चुनावी समर्थन को ध्यान में रखते हुए समुदाय की मांगों पर गंभीरता से विचार करे।
राजनीतिक दबाव बढ़ा
इस मांग के बाद कर्नाटक की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि कांग्रेस नेतृत्व इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और मंत्रिमंडल विस्तार में किन नामों को जगह मिलती है।

