7 Jun 2026, Sun

Somvati Amavasya 2026 Date: सोमवती अमावस्या कब है 14 या 15 जून? यहां कंफ्यूजन करें दूर, जानें सही तारीख और स्नान-दान मुहूर्त

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व दिया गया है। इस दिन पितरों का तर्पण, स्नान-दान और पूजा-पाठ करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तब उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। वर्ष 2026 में जून माह में पड़ने वाली सोमवती अमावस्या को बेहद शुभ माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए पूजा-पाठ, दान और व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

कब है सोमवती अमावस्या 2026?

वैदिक पंचांग के अनुसार, अधिक मास के ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का आरंभ 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर होगा। वहीं इसका समापन 15 जून 2026 को सुबह 8 बजकर 24 मिनट पर होगा। हिंदू धर्म में उदया तिथि को महत्व दिया जाता है, इसलिए सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजा 15 जून 2026, सोमवार को की जाएगी।

इस दिन देशभर के श्रद्धालु गंगा, यमुना, नर्मदा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करेंगे। जो लोग तीर्थस्थलों तक नहीं पहुंच सकते, वे घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर भी धार्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

धार्मिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। सोमवती अमावस्या पर स्नान-दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त को सबसे उत्तम माना गया है।

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:04 बजे से 4:44 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:12 बजे से 1:06 बजे तक

इन शुभ समयों में स्नान, पूजा और दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

क्या है सोमवती अमावस्या का महत्व?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सोमवती अमावस्या का दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। विवाहित महिलाएं इस दिन व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। वहीं अविवाहित युवक-युवतियां भी मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए इस दिन पूजा करते हैं।

मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र और चंदन अर्पित करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। शिवलिंग पर जलाभिषेक कर खीर का भोग लगाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

पितरों की शांति के लिए विशेष दिन

अमावस्या तिथि को पितरों का दिन भी माना जाता है। इस अवसर पर तर्पण, श्राद्ध और दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।

निष्कर्ष

सोमवती अमावस्या 2026 धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 15 जून को पड़ने वाली इस पावन तिथि पर श्रद्धालु स्नान-दान, शिव पूजा और पितरों का तर्पण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए धार्मिक कार्य जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

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