मिस्ट्री और क्राइम थ्रिलर की दुनिया में ऐसी कहानियां हमेशा दर्शकों का ध्यान खींचती हैं, जिनमें किसी अपने के अचानक गायब होने का रहस्य हो। ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ भी एक मां की अपनी लापता बेटी को तलाशने की कहानी है। सीरीज की शुरुआत एक भावनात्मक सवाल से होती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, इसमें इतने सारे रहस्य और सब-प्लॉट जुड़ते जाते हैं कि मूल कहानी की पकड़ कमजोर पड़ने लगती है।
कहानी एक ऐसी मां के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी नवजात बेटी कई साल पहले अस्पताल से रहस्यमय तरीके से गायब हो जाती है। जांच के बावजूद बच्ची का कोई पता नहीं चलता। वक्त गुजरने के साथ परिवार अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने की कोशिश करता है, लेकिन मां इस घटना को स्वीकार नहीं कर पाती। उसे लगातार विश्वास रहता है कि उसकी बेटी जिंदा है और किसी दिन उसके सामने जरूर आएगी।
कहानी में नया मोड़ तब आता है, जब हर साल बेटी के जन्मदिन के आसपास उसे एक रहस्यमय तस्वीर मिलने लगती है। इन तस्वीरों के बाद पुराना जख्म फिर ताजा हो जाता है और वह अपनी बेटी की तलाश दोबारा शुरू करती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक ऐसे परिवार से होती है, जिसकी बेटी की उम्र उसकी खोई हुई बच्ची की संभावित उम्र के बराबर है। यहीं से पहचान, रिश्तों और सच्चाई को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं।
सीरीज का शुरुआती हिस्सा दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखने में कामयाब रहता है। एक मां की उम्मीद, सालों पुराना रहस्य और बच्ची की पहचान से जुड़ा सवाल कहानी को मजबूत आधार देते हैं। हर किरदार के आसपास संदेह की गुंजाइश रखी गई है, जिससे यह पता लगाना आसान नहीं होता कि आखिर सच किसके पीछे छिपा है।
हालांकि, कहानी आगे बढ़ने के साथ कई अतिरिक्त ट्रैक जुड़ते जाते हैं। अवैध सरोगेसी, पारिवारिक तनाव, रिश्तों में धोखा, मानसिक भ्रम और दूसरी रहस्यमय घटनाएं मुख्य कहानी के साथ चलने लगती हैं। अलग-अलग घटनाएं अपने स्तर पर दिलचस्प हैं, लेकिन इनकी अधिकता से कहानी बिखरी हुई महसूस होती है। जिस सवाल का जवाब जानने के लिए दर्शक सीरीज देखना शुरू करता है, वह कई दूसरे सवालों के बीच दब जाता है।
मिस्ट्री के स्तर पर भी सीरीज पूरी तरह प्रभाव नहीं छोड़ पाती। कई जगह कहानी ऐसे संकेत देती है, जिनसे संभावित ट्विस्ट का अंदाजा पहले ही लगाया जा सकता है। कुछ रहस्य जिस तरह सामने आते हैं, वे स्वाभाविक लगने के बजाय कहानी को आगे बढ़ाने की जरूरत जैसे महसूस होते हैं। डीएनए टेस्ट जैसे जांच के तरीकों का बार-बार इस्तेमाल भी धीरे-धीरे अपना असर खो देता है।
सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसका मूल विचार और मां-बेटी के रिश्ते से जुड़ा भावनात्मक आधार है। अगर कहानी इसी केंद्रीय रहस्य पर ज्यादा ध्यान देती और गैरजरूरी ट्रैक कम रखती, तो इसका प्रभाव कहीं ज्यादा मजबूत हो सकता था। कुल मिलाकर, ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ में एक अच्छी मिस्ट्री का आधार जरूर मौजूद है, लेकिन धीमी रफ्तार, ज्यादा सब-प्लॉट और कुछ अनुमानित मोड़ इसकी पकड़ को कमजोर कर देते हैं। जो दर्शक रहस्य और पारिवारिक ड्रामा पसंद करते हैं, उनके लिए इसमें कुछ दिलचस्प हिस्से हैं, लेकिन पूरी सीरीज लगातार रोमांच बनाए रखने में सफल नहीं होती।

