भारत की राजधानी नई दिल्ली में मंगलवार को क्वाड (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष कूटनीतिक नेताओं ने हिस्सा लिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा वैश्विक चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की। बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने की।
बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio, जापान के विदेश मंत्री Toshimitsu Motegi और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong भी शामिल हुए। चारों देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए एस. जयशंकर ने कहा कि यह चर्चा बेहद सार्थक और उपयोगी रही। उन्होंने बताया कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे समय में समान विचारधारा वाले लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। जयशंकर ने समुद्री सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, अंडरसी केबल, आपदा राहत, क्षमता निर्माण और समुद्री निगरानी जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि क्वाड भविष्य में इन क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करेगा।
विदेश मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई आवश्यक है। साथ ही, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर उसके प्रभाव को भी बैठक में प्रमुखता से उठाया गया।
जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा कि ‘मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक’ (FOIP) की अवधारणा को आगे बढ़ाने में क्वाड की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और ऐसे में क्षेत्रीय देशों को अपनी सुरक्षा और आर्थिक क्षमता मजबूत करने की आवश्यकता है। मोतेगी ने विश्वास जताया कि क्वाड देशों का सहयोग इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और विकास को नई दिशा देगा।
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक तनाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा प्रमुख हैं। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संभावित खतरों का उल्लेख करते हुए कहा कि समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और सुरक्षित व्यापार व्यवस्था को बनाए रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है।
बैठक की सबसे महत्वपूर्ण घोषणाएं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कीं। उन्होंने ‘इंडो-पैसिफिक समुद्री निगरानी सहयोग पहल’ की शुरुआत की घोषणा की, जिसके तहत चारों देश समुद्री सुरक्षा से जुड़ी सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान करेंगे। इसके अलावा ‘इंडो-पैसिफिक समुद्री क्षेत्र जागरूकता पहल’ के विस्तार का भी ऐलान किया गया, जिससे क्षेत्र के देशों को लगभग वास्तविक समय में समुद्री गतिविधियों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
रूबियो ने भारत की सराहना करते हुए कहा कि भारत आगामी ‘क्वाड एट सी’ मिशन की मेजबानी करेगा, जिसमें चारों देशों के तटरक्षक बल संयुक्त अभ्यास और सहयोग कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।
नई दिल्ली में हुई यह बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि क्वाड देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने के लिए अपने सहयोग को और व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

