22 Apr 2026, Wed

ODI विश्व कप 2011 क्यों नहीं खेल पाए रोहित शर्मा, खुद सिलेक्टर ने कर दिया बड़ा खुलासा

2011 वनडे वर्ल्ड कप भारतीय क्रिकेट इतिहास का एक सुनहरा अध्याय माना जाता है, लेकिन इसी टूर्नामेंट से जुड़ा एक ऐसा किस्सा अब सामने आया है, जिसने फैंस को हैरान कर दिया है। टीम इंडिया के कप्तान रहे एमएस धोनी की अगुवाई में भारत ने जब ट्रॉफी जीती थी, तब युवा बल्लेबाज रोहित शर्मा उस टीम का हिस्सा नहीं थे। अब इस फैसले को लेकर उस समय के मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत ने बड़ा खुलासा किया है।

श्रीकांत ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि रोहित शर्मा को 2011 वर्ल्ड कप स्क्वॉड से बाहर करना आसान फैसला नहीं था। उनके मुताबिक, यह चयन रणनीति का हिस्सा था, न कि किसी खिलाड़ी की क्षमता पर सवाल। उन्होंने कहा कि उस समय चयन समिति एक अलग कॉम्बिनेशन पर काम कर रही थी, जिसमें टीम में ज्यादा से ज्यादा ऑलराउंडर्स शामिल किए जा सकें।

श्रीकांत ने स्पष्ट किया कि 1983 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम की तरह 2011 की टीम को भी संतुलित रखने की कोशिश की गई थी। उस ऐतिहासिक टीम में कई ऐसे खिलाड़ी थे जो बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी भी कर सकते थे। इसी मॉडल को ध्यान में रखते हुए चयनकर्ताओं ने 2011 की टीम बनाई।

उन्होंने कहा कि उस समय टीम में युवराज सिंह, यूसुफ पठान, सुरेश रैना और यहां तक कि सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग जैसे खिलाड़ी भी जरूरत पड़ने पर गेंदबाजी कर सकते थे। युवराज सिंह को उस टूर्नामेंट में ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ चुना गया था, जिन्होंने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों से अहम योगदान दिया था।

श्रीकांत ने यह भी स्वीकार किया कि रोहित शर्मा उस समय शानदार फॉर्म में थे और टीम में जगह बनाने के पूरी तरह हकदार थे, लेकिन चयन रणनीति के चलते उन्हें बाहर रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह फैसला जानबूझकर किसी खिलाड़ी को हटाने के लिए नहीं लिया गया था, बल्कि टीम कॉम्बिनेशन की जरूरत के हिसाब से किया गया था।

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि श्रीकांत ने खुद माना कि बाद में उन्हें इस फैसले पर अफसोस हुआ। उन्होंने कहा कि उन्होंने रोहित शर्मा से इस बात के लिए माफी भी मांगी थी और स्वीकार किया कि रोहित उस वर्ल्ड कप स्क्वॉड में शामिल होने के योग्य थे।

हालांकि, रोहित शर्मा के करियर ने इसके बाद शानदार वापसी की। उन्होंने आगे चलकर भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में अपनी जगह बनाई और बाद में वनडे वर्ल्ड कप में टीम की कप्तानी भी संभाली।

यह खुलासा एक बार फिर यह दिखाता है कि क्रिकेट में चयन केवल प्रतिभा पर नहीं, बल्कि उस समय की टीम रणनीति और संतुलन पर भी निर्भर करता है।

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