ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच सैय्यद मुज्तबा खामेनेई का एक अहम बयान सामने आया है। ईरान के सुप्रीम लीडर और सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ ने देश की सेना की जमकर सराहना करते हुए कहा है कि ईरानी सेना हर हाल में अपने देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा कर रही है।
यह बयान 18 अप्रैल 2026 को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सेना के स्थापना दिवस के मौके पर जारी किया गया। अपने संदेश में खामेनेई ने कहा कि ईरान की सेना ने न सिर्फ बाहरी दुश्मनों का डटकर सामना किया है, बल्कि देश को तोड़ने की साजिशों को भी नाकाम किया है। उन्होंने खासतौर पर अमेरिका और पहलवी शासन के वंशजों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी विभाजनकारी योजनाएं कभी सफल नहीं होंगी।
सैय्यद मुज्तबा खामेनेई ने अपने संदेश की शुरुआत धार्मिक संदर्भ से की और कुरान की आयत का हवाला देते हुए कहा कि अल्लाह उन लोगों से प्रेम करता है जो उसकी राह में एकजुट होकर संघर्ष करते हैं। उन्होंने इसे ईरानी सेना की एकता और अनुशासन का प्रतीक बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की सेना केवल एक सैन्य बल नहीं, बल्कि “राष्ट्र की संतान” है, जो जनता के बीच से निकलकर देश की रक्षा करती है। उन्होंने सेना के साहस और समर्पण को सराहते हुए कहा कि यह बल देश के जल, जमीन और राष्ट्रीय ध्वज की सुरक्षा में पूरी तरह सक्षम है।
खामेनेई ने यह भी दावा किया कि ईरानी सेना ने अमेरिका की “शैतानी साजिशों” और अलगाववादी ताकतों के खिलाफ एक मजबूत दीवार का काम किया है। उन्होंने कहा कि जो ताकतें ईरान को कमजोर या विभाजित करना चाहती हैं, उन्हें बार-बार मुंह की खानी पड़ी है। उनके अनुसार, ईरान की सैन्य ताकत और जनता का समर्थन ही देश की सबसे बड़ी शक्ति है।
इस बयान को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी टकराव के बीच इस तरह के बयान क्षेत्रीय राजनीति को और प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संदेश न सिर्फ घरेलू जनता को संबोधित करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी एक स्पष्ट संकेत देता है कि ईरान अपनी नीतियों पर अडिग है।
ईरान की सेना का स्थापना दिवस देश में हर साल बड़े पैमाने पर मनाया जाता है, जिसमें सैन्य शक्ति का प्रदर्शन और देशभक्ति का संदेश प्रमुख होता है। इस अवसर पर शीर्ष नेतृत्व द्वारा सेना की भूमिका को रेखांकित करना परंपरा का हिस्सा रहा है।
कुल मिलाकर, सैय्यद मुज्तबा खामेनेई का यह बयान मौजूदा वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि ईरान अपनी संप्रभुता को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है और बाहरी दबावों के बावजूद अपनी सैन्य और राजनीतिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने की रणनीति पर कायम है।

