ईरान-यूएस तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य पर बयान के बाद ट्रंप की चीन यात्रा और नई कूटनीतिक हलचल
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के फैसले से वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत आई है और इससे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी काफी खुश हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में लिखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने या जल्द खुलने की स्थिति से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में सुधार होगा। उन्होंने यह भी कहा कि चीन इस फैसले से विशेष रूप से लाभान्वित होगा क्योंकि वह इस मार्ग से तेल और गैस आयात पर काफी हद तक निर्भर है। ट्रंप ने आगे बताया कि उनकी चीन यात्रा तय है और वहां राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी मुलाकात “खास और ऐतिहासिक” हो सकती है।
व्हाइट हाउस ने भी ट्रंप के इस बयान को साझा करते हुए संकेत दिया कि आने वाले दिनों में अमेरिका और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों में महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है। ट्रंप ने लिखा, “राष्ट्रपति शी बहुत खुश हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला हुआ है या तेजी से खुल रहा है। हमारी बैठक बहुत खास होगी और इसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।”
हालांकि, इसी बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और भी बढ़ गया है। ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आने वाले बुधवार तक कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक समझौता पूरा नहीं हो जाता, अमेरिका होर्मुज क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान ने हाल ही में घोषणा की थी कि वह सीजफायर के दौरान इस मार्ग को सभी देशों के लिए खुला रखेगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है।
लेकिन ट्रंप की धमकियों के बाद ईरान ने भी रुख बदलते हुए चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई, तो वह एक बार फिर होर्मुज को बंद करने पर विचार कर सकता है। इस स्थिति में वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है, क्योंकि इस मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल और गैस की आपूर्ति होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। साथ ही, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है, खासकर उन देशों पर जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं।
फिलहाल, अमेरिका, ईरान और चीन के बीच इस घटनाक्रम ने वैश्विक कूटनीति को एक बार फिर संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में होने वाली वार्ताएं इस पूरे संकट की दिशा तय कर सकती हैं।

