ईरान-अमेरिका और इज़रायल के बीच जारी संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बाधित हो गया है। इस संकट से निपटने के लिए फ्रांस और ब्रिटेन की अगुवाई में शुक्रवार को पेरिस में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें दर्जनों देश हिस्सा ले रहे हैं। खास बात यह है कि इस बैठक में अमेरिका को शामिल नहीं किया गया है, ताकि गैर-युद्धरत देशों की स्वतंत्र पहल के जरिए समाधान खोजा जा सके।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर इस बैठक का नेतृत्व कर रहे हैं। दोनों नेताओं का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और वहां समुद्री यातायात को सुरक्षित बनाने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करना है।
दरअसल, 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद ईरान ने इस संकरे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारी अस्थिरता देखने को मिल रही है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
पेरिस में हो रही यह बैठक उन देशों की पहल का हिस्सा है जो न तो इस युद्ध में शामिल हैं और न ही इसके लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन इसके प्रभावों से गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। सम्मेलन में “समुद्री नौवहन स्वतंत्रता पहल” के तहत ऐसे उपायों पर चर्चा हो रही है, जिससे जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित मिशन “सख्ती से रक्षात्मक” होगा और इसका उद्देश्य केवल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि किसी प्रकार की सैन्य आक्रामकता। उन्होंने यह भी कहा कि मिशन को तभी लागू किया जाएगा जब सुरक्षा स्थिति इसकी अनुमति देगी।
वहीं, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ईरान पर कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया कि वह वैश्विक अर्थव्यवस्था को “बंधक” बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जलडमरूमध्य को बिना शर्त और तुरंत खोलना एक वैश्विक जिम्मेदारी है और इसके लिए सामूहिक कार्रवाई जरूरी है।
सूत्रों के अनुसार, इस पहल के तहत खुफिया सहयोग, समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने (माइन क्लियरिंग), सैन्य एस्कॉर्ट और तटीय देशों के साथ बेहतर समन्वय जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। फ्रांसीसी सैन्य अधिकारियों ने बताया कि यह मिशन अभी निर्माणाधीन है और इसमें शामिल देश अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द नहीं खुलता, तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों, व्यापार और सप्लाई चेन पर और गंभीर रूप से पड़ सकता है। ऐसे में पेरिस में हो रहा यह सम्मेलन न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

