23 Apr 2026, Thu

BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने पुतिन आ सकते हैं भारत, द्विपक्षीय रिश्तों को मिलेगी और ताकत

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन सितंबर 2026 में भारत की यात्रा पर आ सकते हैं, जहां वे नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। क्रेमलिन के सूत्रों के अनुसार यह दौरा एक साल से भी कम समय में उनकी दूसरी भारत यात्रा होगी, जो भारत-रूस संबंधों की गहराई को दर्शाता है।

भारत इस वर्ष BRICS समूह की अध्यक्षता कर रहा है और 18वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सम्मेलन सितंबर के मध्य (संभावित रूप से 12-13 सितंबर) को आयोजित किया जा सकता है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में भी इस महत्वपूर्ण मंच की मेजबानी कर चुका है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति पुतिन “निश्चित रूप से” इस सम्मेलन में शामिल होंगे।

BRICS समूह, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, वैश्विक स्तर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण मंच है। हाल के वर्षों में इस संगठन का विस्तार भी हुआ है, जिससे इसकी वैश्विक भूमिका और प्रभाव बढ़ा है। यह मंच आर्थिक सहयोग, व्यापार विस्तार, बहुपक्षीय सुधार और वैश्विक शासन से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए जाना जाता है।

वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में, जहां ऊर्जा संकट, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं, BRICS सम्मेलन का महत्व और भी बढ़ जाता है। भारत की अध्यक्षता का थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा गया है, जो मानवता-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

राष्ट्रपति पुतिन की यह संभावित यात्रा भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी सहयोग पहले से ही मजबूत है। दिसंबर 2025 में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान भी दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा की थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS सम्मेलन में पुतिन की भागीदारी से “ग्लोबल साउथ” की आवाज को और मजबूती मिलेगी। यह मंच विकासशील देशों को अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करता है।

नई दिल्ली में होने वाला यह शिखर सम्मेलन न केवल सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक मंच पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति को भी मजबूत करेगा। पुतिन की उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना सकती है, जिससे भारत-रूस संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद है।

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