Iran–US War: पहले दौर की वार्ता फेल, अब पाकिस्तान फिर बना मध्यस्थ; तेहरान में Asim Munir की सक्रिय कूटनीति
तेहरान/इस्लामाबाद/वाशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश में जुट गया है। इस्लामाबाद में हुई पहली शांति वार्ता के विफल होने के बाद अब पाकिस्तान दूसरे दौर की बातचीत करवाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। इसी सिलसिले में पाकिस्तान के आर्मी चीफ Asim Munir इन दिनों तेहरान दौरे पर हैं, जहां वे ईरानी नेतृत्व के साथ अहम बातचीत कर रहे हैं।
पहले दौर की वार्ता रही बेनतीजा
गौरतलब है कि 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच पहली शांति वार्ता आयोजित की गई थी। यह बैठक करीब 21 घंटे तक चली, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति J. D. Vance कर रहे थे, जबकि ईरान की ओर से उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मौजूद था। वार्ता के अंत में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए अपने-अपने देश लौट गए।
पाकिस्तान की नई कोशिश
पहली कोशिश के असफल होने के बावजूद पाकिस्तान पीछे हटने के मूड में नहीं है। Asim Munir बुधवार से तेहरान में हैं और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं। इन बैठकों का मकसद दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की वार्ता के लिए सहमति बनाना है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान दौरे के बाद मुनीर सीधे वाशिंगटन जा सकते हैं, जहां वे अमेरिकी अधिकारियों से भी बातचीत करेंगे। इससे साफ है कि पाकिस्तान खुद को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
इमेज सुधारने की रणनीति
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस पहल के जरिए अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारना चाहता है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को हाल ही में सऊदी अरब और कतर से करीब 5 अरब डॉलर की मदद मिली है। माना जा रहा है कि इस तरह की कूटनीतिक पहल से उसे और आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है।
क्षेत्रीय तनाव के बीच अहम भूमिका
ईरान-अमेरिका के बीच तनाव का असर पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र पर पड़ रहा है। ऐसे में पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। हालांकि, पहले दौर की विफलता को देखते हुए यह साफ नहीं है कि दूसरी कोशिश कितनी सफल होगी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, पाकिस्तान एक बार फिर ईरान और अमेरिका के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश में जुटा है। Asim Munir की कूटनीतिक सक्रियता इस दिशा में अहम मानी जा रही है। अब देखना होगा कि क्या यह प्रयास सफल होता है या फिर पहली वार्ता की तरह यह भी बेनतीजा साबित होती है।

