Iran-US Peace Talks: दूसरे दौर की वार्ता पर संकट, सीजफायर खत्म होने से पहले बढ़ा तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में पहुंच गई है। दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जबकि मौजूदा सीजफायर समाप्त होने में सिर्फ एक दिन शेष रह गया है। ऐसे में मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने अपनी वार्ता टीम को इस्लामाबाद रवाना कर दिया है। इस टीम का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के द्वारा किए जाने की बात कही जा रही है। अमेरिका की ओर से संकेत दिए गए हैं कि वह ईरान के साथ बातचीत जारी रखना चाहता है, लेकिन इसके लिए कुछ कठोर शर्तें भी रखी गई हैं।
दूसरी ओर, ईरान इस बार शांति वार्ता में भाग लेने के लिए उत्साहित नहीं दिख रहा है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने स्पष्ट बयान देते हुए कहा है कि धमकियों के माहौल में किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका क्षेत्र में दबाव और नाकेबंदी की रणनीति अपनाकर ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा है।
गालिबाफ ने कहा कि होर्मुज क्षेत्र में तनाव और युद्धविराम के कथित उल्लंघन के जरिए अमेरिका वार्ता को “समझौते” की बजाय “आत्मसमर्पण” में बदलना चाहता है। उन्होंने दावा किया कि ईरान किसी भी दबाव में बातचीत स्वीकार नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर वह अपने विकल्पों का उपयोग करने के लिए तैयार है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में ईरान ने सैन्य और रणनीतिक स्तर पर अपनी तैयारियां मजबूत की हैं। उनके अनुसार, देश किसी भी संभावित संघर्ष या दबाव का जवाब देने में सक्षम है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बीच ईरान को सख्त संदेश दिया है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह समाप्त करना होगा और किसी भी प्रकार के परमाणु हथियार की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन केवल तब जब ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ दे।
ट्रंप ने यह भी कहा कि वह वरिष्ठ ईरानी नेताओं से मिलने के लिए तैयार हैं, लेकिन केवल एक स्पष्ट समझौते की शर्त पर। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बातचीत विफल होती है, तो इसके परिणाम गंभीर और विनाशकारी हो सकते हैं।
जब उनसे संभावित विफलता के परिणामों के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा कि वह इस विषय पर विस्तार से टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन स्थिति “अच्छी नहीं होगी”।
वर्तमान हालात को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता विफल होती है, तो पश्चिम एशिया में तनाव और तेज हो सकता है। विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक क्षेत्र में स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है, जिसका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल दोनों देशों के रुख में कठोरता बनी हुई है। अमेरिका जहां परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की मांग पर अड़ा है, वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है। ऐसे में आने वाले 24 घंटे इस वार्ता के भविष्य के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।

