24 Apr 2026, Fri

H-1B Visa सिलेक्शन रेट में भारी उछाल, कम आवेदनों से बढ़ी सफलता दर, क्या सफल रही ट्रंप की पॉलिसी?

H-1B Visa 2026: अमेरिका में लॉटरी सिस्टम में बड़ा बदलाव, सिलेक्शन रेट 75% तक पहुंचा

अमेरिका में H-1B वीजा लॉटरी 2026 के नतीजों में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई श्रेणियों में चयन दर (Selection Rate) बढ़कर लगभग 75 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह पिछले कुछ वर्षों की तुलना में एक बड़ा उछाल माना जा रहा है, क्योंकि पहले यह दर लगभग 33 प्रतिशत के आसपास रहती थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण आवेदनों की संख्या में भारी गिरावट और ट्रंप प्रशासन की नई इमिग्रेशन नीतियां हैं। इन नीतियों के तहत विदेशी कर्मचारियों की भर्ती पर सख्ती और भारी शुल्क लगाए जाने से कई कंपनियों ने H-1B वीजा स्पॉन्सरशिप कम कर दी है।

आवेदनों में बड़ी गिरावट

ब्लूमबर्ग लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष H-1B वीजा के लिए लगभग 1,95,000 से 2,35,000 आवेदन प्राप्त हुए, जो पिछले साल की तुलना में करीब 43 प्रतिशत कम हैं। यह आंकड़ा 2020 में ऑनलाइन लॉटरी सिस्टम शुरू होने के बाद सबसे कम माना जा रहा है। कुछ साल पहले तक यह संख्या 7,50,000 से अधिक तक पहुंच चुकी थी।

इस गिरावट की एक प्रमुख वजह ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू की गई 1 लाख डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) की नई फीस है, जिसने विदेशी भर्ती को काफी महंगा बना दिया है। इसके चलते कई अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और टेक कंपनियों ने विदेश से कर्मचारियों को हायर करने में कटौती की है।

सिलेक्शन रेट में क्यों आया उछाल?

H-1B वीजा के लिए कुल वार्षिक कैप 85,000 है। जब आवेदनों की संख्या घटती है, तो स्वाभाविक रूप से चयन की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि इस बार कई लॉ फर्मों और कंपनियों ने चयन दर में सुधार देखा है।

रिपोर्ट के अनुसार, Berry Appleman & Leiden (BAL) जैसे इमिग्रेशन लॉ ग्रुप्स के कुछ क्लाइंट्स के लिए चयन दर 60 प्रतिशत से ऊपर रही। वहीं Ogletree Deakins, Erickson Immigration Group और Boundless Immigration जैसी फर्मों ने भी बेहतर परिणाम दर्ज किए हैं। उच्च वेतन और मास्टर्स डिग्री वाले आवेदकों के लिए चयन दर कई मामलों में 75 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई है।

नई “वेटेड लॉटरी सिस्टम” का असर

अमेरिकी प्रशासन ने H-1B सिस्टम में बदलाव करते हुए एक “weighted lottery system” लागू किया है। इस सिस्टम के तहत उच्च वेतन पाने वाले और अधिक अनुभवी पेशेवरों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे फ्रेशर्स की तुलना में अनुभवी उम्मीदवारों के चयन की संभावना बढ़ गई है।

टेक सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग और वरिष्ठ भूमिकाओं पर फोकस के कारण भी कंपनियों ने विदेशी भर्ती में सावधानी बरती है। कई कंपनियों ने अनिश्चित नीतियों के चलते इस वर्ष लॉटरी में भागीदारी कम कर दी।

विवाद और कानूनी चुनौतियां

हालांकि, ट्रंप प्रशासन की नई नीति और भारी शुल्क व्यवस्था को लेकर अमेरिका में कानूनी चुनौतियां भी चल रही हैं। कई याचिकाएं अदालतों में लंबित हैं, जिनमें इस फीस और चयन प्रणाली की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में अदालतों के फैसले और सरकार की नई नीतियां H-1B वीजा प्रोग्राम की दिशा तय करेंगी। यदि शुल्क और नियमों में बदलाव होता है, तो आवेदन संख्या और चयन दर दोनों पर असर पड़ सकता है।

निष्कर्ष

H-1B वीजा 2026 के नतीजे दिखाते हैं कि अमेरिकी इमिग्रेशन नीति में हो रहे बदलावों का सीधा असर वैश्विक प्रतिभा प्रवासन (global talent migration) पर पड़ रहा है। आवेदन घटने से जहां चयन दर में बढ़ोतरी हुई है, वहीं यह भी स्पष्ट है कि उच्च शुल्क और सख्त नीतियां विदेशी पेशेवरों के लिए अमेरिका की राह कठिन बना रही हैं। आने वाला समय इस कार्यक्रम के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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