फुटबॉल जगत के सबसे बड़े टूर्नामेंट फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आगाज 12 जून से हो गया है, लेकिन पहले ही दिन स्टेडियम में दर्शकों की कमी ने आयोजकों की चिंता बढ़ा दी। इस बार वर्ल्ड कप का आयोजन अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में किया जा रहा है, जिसमें सबसे ज्यादा मुकाबले अमेरिका में खेले जाएंगे।
ओपनिंग मैच से हुई शुरुआत
टूर्नामेंट का पहला मुकाबला मेक्सिको और साउथ अफ्रीका के बीच खेला गया, लेकिन इसके बावजूद स्टेडियम में उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुट पाई। वहीं कुछ अन्य मुकाबलों, जैसे साउथ कोरिया और चेक रिपब्लिक के बीच खेले गए मैच में भी हजारों सीटें खाली नजर आईं।
टिकट की महंगाई बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, स्टेडियम खाली रहने की सबसे बड़ी वजह टिकटों की बेहद ऊंची कीमतें हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ टिकटों की कीमत लगभग 1100 अमेरिकी डॉलर (करीब 1.04 लाख रुपये) तक पहुंच गई, जिससे आम दर्शकों के लिए मैच देखना मुश्किल हो गया।
पिछले फीफा वर्ल्ड कप (कतर) की तुलना में इस बार टिकट कीमतों में कई गुना बढ़ोतरी देखी गई है, जिसका सीधा असर स्टेडियम की उपस्थिति पर पड़ा है।
1.80 लाख टिकट रीसेल में अटके
जानकारी के अनुसार, करीब 1,80,000 टिकट रीसेल पोर्टल्स पर नहीं बिक पाए। आखिरी समय में कीमतें घटाने की कोशिश भी की गई, लेकिन तब भी कई सीटें खाली रह गईं।
फीफा ने इस बार “डायनामिक प्राइसिंग सिस्टम” अपनाया है, जिसमें मांग के आधार पर टिकट की कीमतें बदलती रहती हैं। हालांकि यह रणनीति शुरुआती मैचों में सफल नहीं रही।
आयोजकों के सामने नई चुनौती
कम दर्शकों की उपस्थिति के बाद अब अमेरिकी अधिकारियों ने इस मामले में एंटी-ट्रस्ट जांच शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि टिकट प्राइसिंग स्ट्रक्चर पर फिर से विचार किया जा सकता है।
फीफा की कमाई का बड़ा स्रोत
फीफा की अधिकांश कमाई वर्ल्ड कप से ही होती है, जिसमें टिकट बिक्री, ब्रॉडकास्टिंग राइट्स, स्पॉन्सरशिप और हॉस्पिटैलिटी पैकेज शामिल हैं। ऐसे में स्टेडियम खाली रहना और टिकट बिक्री में गिरावट आयोजकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
फिलहाल, आने वाले मैचों में दर्शकों की संख्या बढ़ाने के लिए नई रणनीति पर काम किया जा सकता है।

