भारत में सोने की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है, लेकिन इसके बावजूद घरेलू बाजार में मांग में कोई कमी नहीं आई है। सर्राफा बाजार से लेकर डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म्स तक, हर जगह ग्राहकों की भारी भीड़ और निवेश का उत्साह साफ नजर आ रहा है। सरकार द्वारा इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद भी लोगों का सोने के प्रति रुझान और मजबूत होता दिख रहा है।
हाल ही में सरकार ने सोने पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 5% से बढ़ाकर 10% कर दिया है। इसके साथ ही एग्रीकल्चर, इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) को भी 1% से बढ़ाकर 5% कर दिया गया है। इस बदलाव के बाद कुल इंपोर्ट ड्यूटी लगभग 15% तक पहुंच गई है। इस फैसले का सीधा असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर पड़ा और दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए।
बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमतें अचानक बढ़कर ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के पार चली गईं। पहले जो सोना करीब ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास मिल रहा था, वह नई ड्यूटी लागू होने के बाद और महंगा हो गया। कीमतों में इस उछाल के बावजूद ज्वेलरी शोरूम्स में खरीदारी कम नहीं हुई है, बल्कि शादी-ब्याह के सीजन और निवेश की मांग के चलते ग्राहकों की भीड़ और बढ़ गई है।
सिर्फ फिजिकल गोल्ड ही नहीं, बल्कि निवेशक अब गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) और डिजिटल गोल्ड की तरफ भी तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निवेश आसान होने और छोटे अमाउंट से शुरुआत करने की सुविधा के कारण युवा निवेशक बड़ी संख्या में इसमें पैसा लगा रहे हैं।
भारत में सोने को सिर्फ एक धातु नहीं बल्कि परंपरा और सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद मांग में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% सोना आयात करता है, और हर साल 700 से 800 टन तक सोने की खपत होती है। इससे देश पर विदेशी मुद्रा का बड़ा बोझ पड़ता है।
इसी बीच सरकार और आर्थिक विशेषज्ञों ने समय-समय पर लोगों से सोने की खपत को लेकर संयम बरतने की अपील भी की है, ताकि देश के आयात बिल पर दबाव कम किया जा सके। हालांकि, भारतीय उपभोक्ताओं पर इन अपीलों और बढ़ती कीमतों का ज्यादा असर नहीं दिख रहा है, खासकर त्योहारों और शादी के मौसम में।
कुल मिलाकर, सोने की कीमतें भले ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हों, लेकिन भारतीय बाजार में इसकी चमक अभी भी बरकरार है। निवेशकों का भरोसा और परंपरागत मांग इस धातु को लगातार मजबूत बनाए हुए है, जिससे आने वाले समय में भी इसके बाजार में सक्रियता बनी रहने की उम्मीद है।

