23 Jun 2026, Tue

Explainer: क्या है फायर सेफ्टी एक्ट, जानिए कोचिंग सेंटर, होटल और अस्पतालों को किन नियमों का करना होता है पालन?

देशभर में बढ़ती आगजनी की घटनाओं ने एक बार फिर सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, दिल्ली समेत कई शहरों में हुए भीषण अग्निकांडों ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं में कई लोगों की जान गई, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया जाए तो ऐसे कई हादसों को रोका जा सकता है।

लखनऊ में हाल ही में एक कोचिंग सेंटर में लगी आग में 15 लोगों की मौत हो गई। इससे पहले दिल्ली में एक होटल में आग लगने की घटना ने भी लोगों को चिंता में डाल दिया था। इन हादसों के बाद स्कूलों, कोचिंग संस्थानों, अस्पतालों, होटलों और व्यावसायिक भवनों में फायर सेफ्टी को लेकर बहस तेज हो गई है।

क्यों बढ़ रहे हैं अग्निकांड?

गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के साथ ही आग लगने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। अधिक बिजली खपत, ओवरलोडेड विद्युत उपकरण, खराब वायरिंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी अक्सर बड़े हादसों का कारण बनती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश मामलों में भवनों में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण नहीं होते या फिर वे लंबे समय से खराब पड़े रहते हैं। कई इमारतों में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था भी नहीं होती, जिससे हादसे के समय लोगों को बाहर निकलने में कठिनाई होती है।

फायर सेफ्टी के लिए क्या हैं नियम?

देश के विभिन्न राज्यों में अग्नि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग कानून लागू हैं। उत्तर प्रदेश में अग्नि सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश फायर प्रिवेंशन एंड फायर सेफ्टी एक्ट, 2005 लागू किया गया है।

इस कानून का उद्देश्य भवनों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, स्कूलों, अस्पतालों, होटलों, मॉल और अन्य सार्वजनिक परिसरों में आग लगने की घटनाओं को रोकना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

फायर सेफ्टी से जुड़े प्रमुख प्रावधान

अग्नि सुरक्षा नियमों के तहत निर्धारित श्रेणी के भवनों में फायर सेफ्टी सिस्टम लगाना अनिवार्य है। इसमें फायर एक्सटिंग्विशर, फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम और पर्याप्त आपातकालीन निकास की व्यवस्था शामिल है।

बहुमंजिला इमारतों, अस्पतालों, मॉल, होटलों और बड़े शैक्षणिक संस्थानों को संचालन से पहले संबंधित फायर विभाग से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) प्राप्त करना होता है।

भवन मालिकों और संचालकों की यह जिम्मेदारी होती है कि वे सभी सुरक्षा मानकों का पालन करें और समय-समय पर उपकरणों की जांच कराते रहें।

इसके अलावा, फायर विभाग को किसी भी भवन का निरीक्षण करने और सुरक्षा मानकों की जांच करने का अधिकार होता है। यदि किसी संस्थान में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नोटिस जारी किया जा सकता है, जुर्माना लगाया जा सकता है या फिर लाइसेंस तक निरस्त किया जा सकता है।

हाल के हादसों ने उठाए गंभीर सवाल

हाल के कई अग्निकांडों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कई सार्वजनिक भवनों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश हादसों में खराब विद्युत व्यवस्था, फायर एनओसी का अभाव, आपातकालीन निकास की कमी और अग्निशमन उपकरणों की अनुपलब्धता प्रमुख कारण बनते हैं।

इसके अलावा, कई भवनों में क्षमता से अधिक लोगों की मौजूदगी और अवैध निर्माण भी जोखिम को बढ़ा देते हैं।

सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सख्ती से पालन कराना भी उतना ही आवश्यक है। नियमित सुरक्षा ऑडिट, फायर ड्रिल और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार किया जा सकता है।

बढ़ती आगजनी की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि अब भवन मालिकों, संस्थानों और प्रशासन को सुरक्षा मानकों के प्रति अधिक जिम्मेदारी दिखानी होगी, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोका जा सके।

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