4 Aug 2026, Tue

भ्रामक और गुमराह करने वाले दावों के खिलाफ FSSAI की बड़ी मुहिम, जानें क्या कहते हैं फूड रेगुलेटर के कायदे-कानून

नई दिल्ली: फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने खाद्य उत्पादों की लेबलिंग और विज्ञापन में किए जाने वाले भ्रामक दावों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। हाल के दिनों में नियामक ने ऐसी कंपनियों पर कार्रवाई तेज कर दी है, जो अपने उत्पादों को ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ या ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों के साथ बेच रही हैं। ताजा कार्रवाई में एफएसएसएआई ने डाबर इंडिया लिमिटेड को कई खाद्य उत्पादों पर ‘100 प्रतिशत’ जैसे दावों के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।

एफएसएसएआई का कहना है कि किसी भी खाद्य उत्पाद के बारे में किया गया दावा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, तथ्यात्मक और उपभोक्ताओं को गुमराह न करने वाला होना चाहिए। यदि कोई कंपनी ऐसे दावे करती है जिनका पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

किन दावों पर जताई आपत्ति?

एफएसएसएआई के अनुसार, कंपनी की वेबसाइट पर बेचे जा रहे कई उत्पादों पर ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योर’, ‘100% प्योरिटी की गारंटी’, ‘100% ऑर्गेनिक’ और ‘100% कोकोनट वॉटर’ जैसे दावे किए जा रहे थे। नियामक ने इन्हें अस्पष्ट, अप्रामाणिक और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाला माना है।

इन दावों वाले उत्पादों में शहद, गाय का घी, सेब का सिरका, वर्जिन नारियल तेल, तिल का तेल, नारियल पानी, नारियल दूध और अन्य खाद्य उत्पाद शामिल बताए गए हैं।

2018 के नियमों का हवाला

एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया कि इस तरह के दावे एफएसएस (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018 का उल्लंघन हो सकते हैं। नियमों के अनुसार, किसी भी खाद्य उत्पाद के संबंध में किया गया दावा स्पष्ट, सत्यापित और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए।

नियामक का मानना है कि ‘100 प्रतिशत’ जैसे शब्द उपभोक्ताओं के मन में यह धारणा बना सकते हैं कि उत्पाद पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक या अन्य उत्पादों से बेहतर है, जबकि इसके समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी हैं।

पहले भी जारी की गई थी एडवाइजरी

एफएसएसएआई ने मई 2025 में पूरे खाद्य उद्योग के लिए एक एडवाइजरी जारी की थी। इसमें सभी फूड बिजनेस ऑपरेटरों से कहा गया था कि वे पैकेजिंग, लेबलिंग और प्रचार सामग्री में ‘100 प्रतिशत’ जैसे दावों का इस्तेमाल करने से बचें

एडवाइजरी में यह भी कहा गया था कि मौजूदा खाद्य नियमों में ‘100 प्रतिशत’ शब्द की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है, इसलिए इसका इस्तेमाल उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है।

कंपनियों के लिए क्या हैं प्रमुख नियम?

एफएसएसएआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार:

  • उत्पाद से जुड़े सभी दावे तथ्यात्मक होने चाहिए।
  • दावे किसी भी तरह से उपभोक्ता को भ्रमित करने वाले नहीं होने चाहिए।
  • पोषण और स्वास्थ्य संबंधी दावे वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होने चाहिए।
  • पर्याप्त प्रमाण के बिना ‘100% शुद्ध’, ‘100% प्राकृतिक’ या ‘100% सुरक्षित’ जैसे शब्दों का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
  • मिलावटी या मिश्रित खाद्य पदार्थों के लिए ‘100 प्रतिशत शुद्ध’ जैसे दावे करना प्रतिबंधित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एफएसएसएआई की यह कार्रवाई पूरे खाद्य उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। आने वाले समय में कंपनियों को अपने उत्पादों की लेबलिंग और विज्ञापन दावों की समीक्षा करनी पड़ सकती है, ताकि वे नियामकीय मानकों का पालन कर सकें और उपभोक्ताओं को सही एवं पारदर्शी जानकारी उपलब्ध करा सकें।

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