नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के मामले में पार्टी अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। TMC ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें खातों को फ्रीज करने पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 3 अगस्त को जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ के समक्ष हो सकती है।
TMC ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि ED ने बिना किसी ठोस सबूत के पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया। पार्टी का कहना है कि एजेंसी की कार्रवाई मनमानी और कानून के दायरे से बाहर है, जिससे उसके नियमित संगठनात्मक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
मामले की शुरुआत 18 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के विधायक बिस्वनाथ दास की शिकायत के बाद हुई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, जिसके बाद 23 जून को ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू की। जांच के दौरान ED ने 7 जुलाई को कुल छह बैंक खाते फ्रीज किए, जिनमें TMC के तीन HDFC बैंक खाते भी शामिल हैं।
ED का आरोप है कि TMC के एक बैंक खाते से करीब 133.84 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर किए गए। एजेंसी का दावा है कि यह लेनदेन धन के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हो सकता है। इसी आधार पर खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई की गई।
दूसरी ओर, TMC ने आरोप लगाया है कि ED ने बिना पर्याप्त साक्ष्यों के बैंक खातों पर रोक लगा दी। पार्टी का कहना है कि 9 जुलाई को कलकत्ता हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने विशेष अधिकारी की निगरानी में इन खातों के सीमित संचालन की अनुमति दी थी, ताकि पार्टी अपने रोजमर्रा के खर्चों और संगठनात्मक गतिविधियों का संचालन कर सके।
हालांकि, 20 जुलाई 2026 को कलकत्ता हाईकोर्ट ने खातों को फ्रीज करने पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस चरण पर फंड ट्रांसफर की वैधता या अवैधता पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि TMC अपनी आपत्तियां PMLA के निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उठा सकती है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी माना था कि ED ने उपलब्ध दस्तावेजों और बैंक लेनदेन की जांच के बाद पर्याप्त कारण दर्ज किए हैं कि बड़ी राशि विभिन्न संस्थाओं को स्थानांतरित की गई थी। इसलिए पहली नजर में खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई उचित प्रतीत होती है।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि शीर्ष अदालत TMC को राहत देती है, तो पार्टी के बैंक खातों के संचालन पर लगी रोक में बदलाव हो सकता है। वहीं, ED की कार्रवाई को चुनौती दिए जाने के कारण यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
3 अगस्त को होने वाली संभावित सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय कर सकता है कि ED द्वारा खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप थी या नहीं, और क्या TMC को अंतरिम राहत दिए जाने की आवश्यकता है।

