देश में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और इसी के साथ क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। Reserve Bank of India द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 से 2025 के बीच क्रेडिट कार्ड से होने वाले लेनदेन में 2.6 गुना से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर डेबिट कार्ड के उपयोग में लगातार गिरावट देखी जा रही है।
आरबीआई की ‘पेमेंट सिस्टम रिपोर्ट, दिसंबर 2025’ के मुताबिक, साल 2021 में क्रेडिट कार्ड के जरिए कुल 216 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे। यह आंकड़ा दिसंबर 2025 तक बढ़कर 570 करोड़ पहुंच गया। सिर्फ ट्रांजैक्शन की संख्या ही नहीं, बल्कि इनके कुल मूल्य में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2021 में क्रेडिट कार्ड के जरिए करीब 8.9 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, जबकि 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 23.2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यानी चार साल में क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन वैल्यू में तीन गुना से ज्यादा की वृद्धि हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन शॉपिंग, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, ईएमआई सुविधाएं और रिवॉर्ड पॉइंट्स जैसी सुविधाओं ने लोगों को क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने के लिए आकर्षित किया है। इसके अलावा युवाओं में डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन और आसान फाइनेंसिंग विकल्पों ने भी इस ग्रोथ को मजबूती दी है।
वहीं दूसरी तरफ डेबिट कार्ड के इस्तेमाल में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 में डेबिट कार्ड से 408.7 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे, जो 2025 तक घटकर 133.6 करोड़ रह गए। इसी अवधि में डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू भी 7.4 lakh करोड़ रुपये से घटकर 4.5 लाख करोड़ रुपये पर आ गई।
Reserve Bank of India ने इस गिरावट की बड़ी वजह यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI, डिजिटल वॉलेट्स और क्रेडिट कार्ड के बढ़ते उपयोग को बताया है। हालांकि, गिरावट के बावजूद डेबिट कार्ड अब भी देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले कार्ड बने हुए हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि क्रेडिट कार्ड बाजार में प्राइवेट सेक्टर के बैंकों का दबदबा लगातार मजबूत हो रहा है। दिसंबर 2021 में जहां निजी बैंकों की हिस्सेदारी 67.7 प्रतिशत थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह बढ़कर 71.1 प्रतिशत हो गई। इससे साफ है कि निजी बैंक तेजी से ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं और इस सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं।
सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह 2021 के मुकाबले बढ़कर 23.9 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं विदेशी बैंकों की हिस्सेदारी घटकर 3.8 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने भी इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2025 तक स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने करीब 14 लाख क्रेडिट कार्ड जारी किए।
आरबीआई के आंकड़े यह भी बताते हैं कि भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली बेहद तेजी से आगे बढ़ रही है। साल 2016 से 2025 के बीच डिजिटल ट्रांजैक्शन की संख्या में 33 गुना की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इनके कुल मूल्य में लगभग तीन गुना का इजाफा हुआ है। इससे साफ है कि भारत तेजी से कैशलेस और डिजिटल इकोनॉमी की ओर बढ़ रहा है।

