10 Oct 2026, Sat

पाकिस्तान ने बोला झूठ तो भारत ने दिया करारा जवाब, यूएन में दुनिया के सामने जमकर लताड़ा

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई है। भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान पर भ्रामक दावे करने और संयुक्त राष्ट्र के मंच का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया। इसके साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में कथित मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया गया। भारतीय प्रतिनिधियों ने इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा और कथित अत्याचारों को रोकने की मांग की।

जम्मू-कश्मीर पर भारत का स्पष्ट रुख

संयुक्त राष्ट्र महासभा की चौथी समिति में 9 अक्टूबर को उपनिवेशवाद से मुक्ति के विषय पर चर्चा हुई। इस दौरान भारत की ओर से सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत का पक्ष रखा।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर को लेकर गलत और भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करना दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा इस विषय पर पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे दावों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

भारत ने यह भी संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के मंचों का इस्तेमाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय वास्तविक समस्याओं और लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए किया जाना चाहिए।

पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकार का मुद्दा

भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इन इलाकों में लोगों को दमन, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

भारत की ओर से यह भी कहा गया कि स्थानीय नागरिक अपने अधिकारों, स्वतंत्रता और आवश्यक सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। आरोपों के मुताबिक, इन मांगों को लेकर विरोध करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की घटनाएं सामने आई हैं। भारतीय पक्ष ने कथित तौर पर नागरिकों की मौत और उनके साथ हुए दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।

भारत ने जोर दिया कि किसी भी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के मौलिक अधिकारों और गरिमा की रक्षा की जानी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों और उनसे संबंधित घटनाओं का स्वतंत्र सत्यापन महत्वपूर्ण है।

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों की जवाबदेही की मांग

इस घटनाक्रम के दौरान सांसद प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के कथित अनुचित आचरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

उन्होंने पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने, शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने और गवाहों की सुरक्षा मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का संदेश

संयुक्त राष्ट्र में भारत के इस रुख को जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर देश की लगातार अपनाई जा रही कूटनीतिक नीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के दावों का विरोध करता रहा है और सीमा पार आतंकवाद तथा मानवाधिकारों से संबंधित मुद्दों को उठाता रहा है।

इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक मतभेद चर्चा में आ गए हैं। भारत ने अपने बयान के माध्यम से स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर उसका रुख अपरिवर्तित है। साथ ही, मानवाधिकारों के संरक्षण, निष्पक्ष जांच और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई है।

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